पटना: भ्रष्टाचार के मामलों में रिश्वतखोर अफसर और कर्मचारी कार्रवाई से बचने के लिए अब सीधे रकम का नाम लेने से भी बच रहे हैं। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पास उपलब्ध ऑडियो रिकॉर्डिंग की पड़ताल में कथित तौर पर ऐसे कई ‘कोडवर्ड’ सामने आए हैं, जिनका इस्तेमाल रिश्वत की रकम तय करने के लिए किया गया। इनमें ‘एक बोरा चावल’ का मतलब एक लाख रुपये, ‘तेल-पानी’ का मतलब 10 हजार रुपये और ‘एक पेटी’ का मतलब एक लाख रुपये बताया गया है।
पिछले करीब डेढ़ साल में निगरानी ब्यूरो द्वारा दर्ज लगभग 50 एफआईआर से जुड़े मामलों में सामने आए ऑडियो की पड़ताल से भ्रष्टाचार के इस कथित ‘कोडवर्ड’ सिस्टम की तस्वीर सामने आती है। अधिकारियों की बातचीत में रकम को सीधे बताने के बजाय सामान और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े शब्दों का इस्तेमाल किए जाने के आरोप हैं।
‘एक बोरा चावल’ बोलकर मांगे एक लाख!
एक मामले में बेटे के खिलाफ दर्ज केस में नाम हटाने को लेकर कथित तौर पर रिश्वत की मांग का मामला सामने आया। बातचीत में रकम के लिए ‘एक बोरा चावल’ जैसे शब्द का इस्तेमाल किया गया। शिकायतकर्ता ने बातचीत रिकॉर्ड कर निगरानी ब्यूरो को उपलब्ध कराई। इसके बाद कथित तौर पर तय रकम के आधार पर कार्रवाई की गई और आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
‘तेल-पानी’ के नाम पर मांगे 10 हजार
एक अन्य मामले में अपहरण के केस की जांच आगे बढ़ाने को लेकर आरोपी पुलिस अधिकारी पर रिश्वत मांगने का आरोप लगा। शिकायतकर्ता के मुताबिक, पहले भी रकम दी जा चुकी थी, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ रहा था। दोबारा संपर्क करने पर कथित तौर पर ‘तेल-पानी’ के नाम पर 10 हजार रुपये की मांग की गई।
बातचीत में जब शिकायतकर्ता ने पूछा कि पहले तेल-पानी दिया था, फिर काम क्यों नहीं हुआ, तो कथित जवाब मिला कि और तेल-पानी देना होगा। इसी बातचीत की रिकॉर्डिंग निगरानी तक पहुंची और इसके बाद ट्रैप कार्रवाई की गई।
13 लाख से ज्यादा के भुगतान के बदले ‘एक पेटी’
एक अन्य मामले में नगर निगम से जुड़े कर्मचारी पर पीएफ, ग्रेच्युटी और अन्य मदों के करीब 13.62 लाख रुपये के बकाया भुगतान की फाइल आगे बढ़ाने के बदले कथित तौर पर रिश्वत मांगने का आरोप लगा।
बातचीत में ‘एक पेटी’ शब्द का इस्तेमाल किया गया। जब इसका मतलब पूछा गया तो कथित तौर पर इसे एक लाख रुपये बताया गया। बातचीत में अतिरिक्त रकम की भी चर्चा हुई। शिकायतकर्ता द्वारा ऑडियो रिकॉर्डिंग निगरानी विभाग को दिए जाने के बाद आरोपी के खिलाफ ट्रैप कार्रवाई की गई।
दो लाख कैश के साथ ‘वाशिंग मशीन’ की मांग का आरोप
जमीन के दाखिल-खारिज से जुड़े एक मामले में भी रिश्वत के कथित अलग अंदाज ने निगरानी अधिकारियों का ध्यान खींचा। आरोप है कि काम कराने के बदले नकद रकम के साथ वाशिंग मशीन को ‘गिफ्ट’ के रूप में देने की बात कही गई।
शिकायतकर्ता मनोज कुमार द्वारा बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग निगरानी विभाग को उपलब्ध कराए जाने के बाद कार्रवाई की गई। मामले में संबंधित डीसीएलआर और उनके कर्मचारी/नौकर को गिरफ्तार किए जाने की बात सामने आई।
ऑडियो रिकॉर्डिंग बनी भ्रष्टाचार के खिलाफ अहम कड़ी
कानूनी जानकारों के मुताबिक, भ्रष्टाचार के मामलों में डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि किसी ऑडियो रिकॉर्डिंग को अदालत में प्रभावी साक्ष्य बनाने के लिए उसकी प्रामाणिकता और आवाज की पहचान समेत जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना होता है।
निगरानी ब्यूरो के लिए ऐसी रिकॉर्डिंग कथित रिश्वत मांगने की बातचीत तक पहुंचने और ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाने में अहम कड़ी साबित हो सकती है। यही वजह है कि रिश्वतखोरी के मामलों में शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए ऑडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच को गंभीरता से लिया जाता है।
‘कोडवर्ड’ के पीछे छिपी रकम चाहे ‘चावल’ हो, ‘तेल-पानी’ हो या ‘पेटी’—निगरानी की जांच का फोकस अब इन शब्दों के पीछे छिपे कथित भ्रष्टाचार के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने पर है।
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