पटना: बिहार में बाढ़ का पानी बढ़ने के साथ ही सियासी तापमान भी चढ़ने लगा है। आरजेडी नेता रोहिणी आचार्य ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार पर बाढ़ प्रबंधन को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में बाढ़ कोई अचानक आने वाली आपदा नहीं, बल्कि हर साल आने वाला संकट है, फिर भी सरकार स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठा पा रही है।
रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि बाढ़ आने से पहले पर्याप्त तैयारी नहीं होती और पानी बढ़ने के बाद हवाई सर्वेक्षण, समीक्षा बैठक और घोषणाओं का दौर शुरू हो जाता है। उन्होंने इसे शासन-प्रशासन की गंभीर विफलता बताया।
उन्होंने बाढ़ नियंत्रण के नाम पर होने वाले खर्च और जमीनी स्थिति को लेकर भी सवाल खड़े किए। रोहिणी का आरोप है कि तटबंधों की मरम्मत, गाद हटाने, जल निकासी और पुनर्वास जैसे मुद्दों पर सरकार को दीर्घकालिक रणनीति बनानी चाहिए।
रोहिणी आचार्य ने दावा किया कि बिहार के बड़े हिस्से में हर साल बाढ़ और कटाव का खतरा रहता है। उन्होंने स्थायी विस्थापन नीति, पूर्व चेतावनी प्रणाली, सुरक्षित पुनर्वास स्थलों और नदी प्रबंधन को लेकर सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग की।
वहीं, बाढ़ की मौजूदा स्थिति में सरकार की ओर से राहत और बचाव अभियान भी जारी है। हालिया सरकारी जानकारी के अनुसार कई जिलों में एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीमें, नावें, राहत शिविर और सामुदायिक रसोई सक्रिय हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी प्रभावित इलाकों का जायजा लेकर अधिकारियों को राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं।
अब बड़ा सवाल यही है—बाढ़ हर साल आती है, तो क्या उसका स्थायी समाधान भी हर साल सिर्फ वादों तक ही रहेगा? रोहिणी आचार्य के हमले ने बिहार की बाढ़ व्यवस्था और सरकार की तैयारियों पर एक बार फिर बड़ा राजनीतिक सवाल खड़ा कर दिया है।
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