नालंदा: प्राचीन ज्ञान परंपरा की धरती नालंदा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रही है। नालंदा विश्वविद्यालय ने ‘नालंदा यूनिवर्सिटी स्कॉलरशिप 2026’ के तहत भूटान से आए नए बैच के युवा स्कॉलर्स का स्वागत किया है। ये छात्र भारत में रहकर अपनी स्नातकोत्तर शिक्षा पूरी करेंगे।
थिम्पू स्थित भारतीय दूतावास की ओर से घोषित इस प्रतिष्ठित स्कॉलरशिप कार्यक्रम के माध्यम से भूटान के प्रतिभाशाली छात्रों को भारत में उच्च शिक्षा का अवसर मिला है। शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में यह पहल भारत और भूटान के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करने वाली मानी जा रही है।
नालंदा विश्वविद्यालय में आने वाले ये स्कॉलर्स आधुनिक और पारंपरिक दोनों तरह के विषयों में अध्ययन करेंगे। इनमें अर्थशास्त्र, अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं शांति अध्ययन, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, दर्शनशास्त्र, बौद्ध अध्ययन, डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इतिहास और गणित जैसे विषय शामिल हैं।
विश्वविद्यालय का उद्देश्य छात्रों को आधुनिक तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा, शांति और सांस्कृतिक मूल्यों से भी जोड़ना है। इसके जरिए छात्र वैश्विक चुनौतियों को समझने के साथ-साथ प्राचीन विचारों और मानवीय मूल्यों का अध्ययन करेंगे।
नालंदा विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पहल के लिए भूटान स्थित भारतीय दूतावास, भारत सरकार के विदेश मंत्रालय, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) और ‘स्टडी इन इंडिया’ कार्यक्रम का आभार जताया है।
गौरतलब है कि नालंदा की पहचान सदियों से दुनिया के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में रही है। अब आधुनिक नालंदा विश्वविद्यालय उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए दुनिया के अलग-अलग देशों के छात्रों को शिक्षा और संस्कृति के एक साझा मंच से जोड़ रहा है।
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