भोजपुर: शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक राकेश रंजन उर्फ राकेश रंजन ओझा को जान से मारने की कथित साजिश का मामला सामने आने के बाद भोजपुर की राजनीति और पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। विधायक के पैतृक गांव ओझवलिया स्थित आवास पर डाक के जरिए एक गुमनाम पत्र पहुंचा था। पत्र में विधायक की हत्या के लिए हथियार और शूटर की कथित व्यवस्था किए जाने का दावा किया गया था।
मामले में विधायक की शिकायत के आधार पर करनामेपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्राथमिकी में भागलपुर विशेष केंद्रीय कारा के जेल अधीक्षक राजीव कुमार झा समेत लंबू शर्मा, कुबेर मिश्रा और हरीश मिश्रा के नाम सामने आए हैं। पुलिस अब पत्र भेजने वाले व्यक्ति की पहचान से लेकर उसमें लगाए गए आरोपों की सत्यता तक की जांच कर रही है।
जुलाई में मिला था गुमनाम पत्र
विधायक की ओर से पुलिस को दिए गए आवेदन के अनुसार, उन्हें आठ जुलाई को डाक के माध्यम से यह पत्र मिला था। पत्र भेजने वाले ने अपना नाम विकास कुमार और पता शाहपुर, भोजपुर बताया था। पत्र में दावा किया गया था कि भागलपुर जेल में बंद कुछ आरोपियों द्वारा विधायक को निशाना बनाने की कथित योजना बनाई जा रही है।
पत्र में जेल में बंद लोगों की गतिविधियों और उनसे मिलने-जुलने वाले लोगों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए थे। साथ ही विधायक पर हमले के लिए कथित तौर पर हथियार और शूटर की व्यवस्था किए जाने की बात कही गई थी।
सुरक्षा को लेकर विधायक ने पुलिस से की शिकायत
गुमनाम पत्र मिलने के बाद विधायक ने तत्काल पुलिस को इसकी जानकारी दी। उन्होंने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर पूरे मामले की जांच कराने और अपनी सुरक्षा को लेकर आवश्यक कदम उठाने की मांग की थी। पुलिस ने पहले 19 जुलाई को सनहा दर्ज किया। इसके बाद जांच आगे बढ़ने पर तीन अगस्त को करनामेपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।
भोजपुर पुलिस के अनुसार, मामले में सामने आए सभी आरोपों की अभी जांच की जा रही है। पुलिस पत्र भेजने वाले व्यक्ति की पहचान करने के साथ-साथ नामजद लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
जेल से जुड़े तथ्यों की भी होगी जांच
भोजपुर पुलिस अधीक्षक राज ने बताया कि गुमनाम पत्र के माध्यम से विधायक को धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है। नामजद आरोपियों के कॉल रिकॉर्ड और जेल से जुड़े तथ्यों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों को अभी अंतिम रूप से सत्यापित नहीं किया गया है। जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि विधायक की हत्या की वास्तविक साजिश रची गई थी या फिर गुमनाम पत्र के जरिए भय का माहौल बनाने की कोशिश की गई।
परिवार पर पहले भी हो चुका है हमला
विधायक राकेश रंजन के परिवार का आपराधिक घटनाओं से पुराना संबंध रहा है। वर्ष 2016 में उनके पिता और भाजपा के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष विशेश्वर ओझा की शाहपुर के सोनबरसा बाजार के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
इसके बाद 16 अप्रैल 2025 को विधायक राकेश रंजन ओझा पर भी गोलीबारी की घटना हुई थी। उस मामले में शाहपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अब नए धमकी भरे पत्र के सामने आने के बाद पुलिस पुराने मामले और वर्तमान घटनाक्रम के बीच संभावित संबंधों की भी जांच कर रही है।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। गुमनाम पत्र की सत्यता, उसे भेजने वाले व्यक्ति और नामजद आरोपियों की कथित भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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