सीतामढ़ी: स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय पंजी का कथित तौर पर अनधिकृत इस्तेमाल कर थानााध्यक्ष को पत्र भेजने के मामले में विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद सिविल सर्जन डॉ. रविंद्र कुमार यादव ने डीसीएम समरेंद्र नारायण वर्मा को निलंबित कर दिया है। आरोप है कि डीसीएम ने विभागीय कार्यालय पंजी पर ज्ञापन और पत्रांक दर्ज कर स्वास्थ्य विभाग की ओर से थाना को पत्र जारी कर दिया, जबकि उन्हें ऐसा पत्र जारी करने का अधिकार नहीं था।
मामले की शुरुआत बैरगनिया निवासी अजय कुमार की ओर से सहयोग पोर्टल पर की गई शिकायत से हुई। शिकायत में स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय पंजी के कथित दुरुपयोग समेत अन्य गंभीर आरोप लगाए गए थे। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की।
जांच कमेटी ने शिकायत से जुड़े दस्तावेजों और आरोपों की पड़ताल की। जांच के दौरान विभागीय पंजी के इस्तेमाल और थाना को भेजे गए पत्र से संबंधित आरोपों की पुष्टि हुई। इसके बाद जांच रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को भेजी गई। मामले की जानकारी कार्यपालक निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं, बिहार, पटना को भी दी गई।
सिविल सर्जन ने बताया कि डीसीएम द्वारा स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय पंजी का अनधिकृत रूप से इस्तेमाल किया गया था। पंजी पर विभागीय ज्ञापन और पत्रांक चढ़ाकर थानााध्यक्ष को पत्र भेजा गया, जबकि डीसीएम को इस तरह का पत्र जारी करने के लिए अधिकृत नहीं किया गया था। जांच में उक्त पत्र को फर्जी पाया गया।
आशा कार्यकर्ताओं की बहाली के नाम पर रुपये लेने की शिकायत भी
मामले में आशा कार्यकर्ताओं की बहाली के नाम पर कुछ लोगों से रुपये लेने और ठगी किए जाने की शिकायत भी सामने आने की बात कही गई है। इस आरोप की भी जांच कमेटी ने पड़ताल की। विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर डीसीएम के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है।
विभागीय स्तर पर हुई इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप की स्थिति है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी दस्तावेजों और कार्यालयीय पंजी के इस्तेमाल को लेकर निर्धारित नियमों का पालन अनिवार्य है। बिना अधिकार विभागीय दस्तावेज के आधार पर पत्र जारी करने के मामले को गंभीरता से लिया गया है।
फिलहाल निलंबन की कार्रवाई के बाद मामले में विभागीय स्तर पर आगे की प्रक्रिया जारी रहने की संभावना है।
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