सहरसा: बिहार इप्टा के 80वें स्थापना वर्ष के अवसर पर सहरसा में राज्य स्तरीय नाट्योत्सव की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इप्टा की जनपक्षधर सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से ‘सच का रंगमंच : रंगों और विचारों का उत्सव’ का आयोजन 2, 3 और 4 अक्टूबर को सहरसा की धरती पर किया जाएगा। तीन दिवसीय इस नाट्योत्सव में बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, लोक-स्मृतियों, जनजीवन और समकालीन सामाजिक सरोकारों को रंगमंच के माध्यम से सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।
नाट्योत्सव को लेकर स्थानीय स्तर पर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। आयोजन में बिहार के विभिन्न जिलों से इप्टा की नाट्य टीमें हिस्सा लेंगी और अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से अलग-अलग सामाजिक एवं सांस्कृतिक विषयों को दर्शकों के सामने रखेंगी।
छह जिलों की इप्टा टीमें होंगी प्रमुख आकर्षण
नाट्योत्सव के संयोजक राजन कुमार ने बताया कि इस आयोजन में भागलपुर इप्टा, मधुबनी इप्टा, सहरसा इप्टा, छपरा इप्टा, कटिहार इप्टा और पटना इप्टा की नाट्य प्रस्तुतियां प्रमुख आकर्षण होंगी। विभिन्न टीमों की प्रस्तुतियों के जरिए बिहार की विविध लोक-संस्कृति और सामाजिक जीवन के अलग-अलग रंगों को मंच पर अभिव्यक्ति दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि नाट्य मंचन के साथ-साथ आयोजन को व्यापक सांस्कृतिक स्वरूप देने की भी तैयारी है। इसके तहत ‘रंग चबूतरा’ पर गीत, नृत्य और लघु नाटकों की प्रस्तुतियां होंगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोकजीवन, जनसंस्कृति और स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी।
‘रंग चबूतरा’ पर दिखेगा लोकजीवन का रंग
आयोजन के दौरान ‘रंग चबूतरा’ विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। यहां गीत, नृत्य और लघु नाटकों के माध्यम से लोकजीवन और जनसंस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति प्रस्तुत की जाएगी। आयोजकों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य रंगमंच को आम लोगों और स्थानीय सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों से जोड़ना है।
इसके साथ ही रंगमंच से जुड़े कलाकारों और युवाओं के लिए संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। ‘रंगमंच की बातें, इप्टा के संग’ जैसे युवा संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से रंगमंच की सामाजिक भूमिका, बदलते समय की चुनौतियों और नई पीढ़ी की आकांक्षाओं पर चर्चा की जाएगी।
रंगमंच की सामाजिक भूमिका पर होगा विमर्श
नाट्योत्सव के दौरान रंग-विमर्श का भी आयोजन किया जाएगा। इसमें रंगकर्मियों और युवाओं के बीच रंगमंच की भूमिका को लेकर संवाद होगा। बदलते सामाजिक परिवेश में रंगमंच किस तरह समाज से संवाद करता है और लोगों के बीच संवेदना एवं विचारों को पहुंचाने का माध्यम बनता है, इस पर चर्चा की जाएगी।
आयोजकों के अनुसार नाट्योत्सव का उद्देश्य केवल नाटकों का मंचन करना नहीं, बल्कि रंगमंच के जरिए समाज, संस्कृति और समकालीन सवालों पर संवाद को मजबूत करना भी है।
गांधी जयंती पर होगा नाट्योत्सव का आगाज
2 अक्टूबर, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के दिन नाट्योत्सव का शुभारंभ होना आयोजन के लिए विशेष महत्व रखता है। संयोजक राजन कुमार ने कहा कि गांधी के लिए सत्य केवल नैतिक मूल्य नहीं, बल्कि सार्वजनिक और सामाजिक जीवन का आधार था।
उन्होंने कहा कि इप्टा की सांस्कृतिक परंपरा भी मनुष्य की गरिमा, सत्य, शांति, समानता और न्याय के पक्ष में खड़े होने की रही है। ‘सच का रंगमंच : रंगों और विचारों का उत्सव’ इसी सांस्कृतिक परंपरा को वर्तमान समय के सवालों से जोड़कर अभिव्यक्ति देने का प्रयास है।
‘सच के रंगमंच’ से देश को जोड़ने का संदेश
इप्टा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रसन्ना ने ‘सच के रंगमंच’ के माध्यम से देश को जोड़ने का आह्वान किया है। आयोजकों ने बताया कि सहरसा में आयोजित होने वाला यह राज्य स्तरीय नाट्योत्सव इसी विचार को बिहार की स्थानीय जमीन, भाषाओं, लोक परंपराओं और सामाजिक अनुभवों के साथ आगे बढ़ाने का प्रयास है।
आयोजकों का कहना है कि रंगमंच को केवल मनोरंजन के माध्यम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह समाज से संवाद करने, सवाल उठाने, संवेदनाओं को सामने लाने और बेहतर समाज की कल्पना को स्वर देने का भी माध्यम है। इसी उद्देश्य के साथ तीन दिवसीय नाट्योत्सव को व्यापक स्वरूप देने की तैयारी की जा रही है।
आयोजन की तैयारी में जुटे रंगकर्मी
राज्य स्तरीय नाट्योत्सव को सफल बनाने के लिए इप्टा के सदस्य और स्थानीय रंगकर्मी लगातार तैयारियों में जुटे हैं। आयोजन की विभिन्न जिम्मेदारियों को लेकर बैठकों का दौर चल रहा है। नाट्य प्रस्तुतियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और संवाद सत्रों को व्यवस्थित रूप से आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।
तैयारी में डॉ. दीपक कुमार गुप्ता, संजय सारथी, अनिल कुमार, विनय कसौधन, एसएस हिमांशु, रमेश पासवान समेत अन्य रंगकर्मी और कार्यकर्ता सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। आयोजकों को उम्मीद है कि तीन दिनों तक चलने वाला यह नाट्योत्सव सहरसा के सांस्कृतिक परिवेश में रंगमंच की नई ऊर्जा और विविध रंगों को सामने लाएगा।
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सहरसा से विकास कुमार रिपोर्ट…