पटना: बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार के निवेश दावों पर गंभीर सवाल उठाते हुए एक कंपनी को लेकर बड़ा आरोप लगाया है। तेजस्वी यादव ने कहा कि जिस कंपनी की कुल पूंजी मात्र 11 लाख रुपये बताई जा रही है, उसके द्वारा बिहार में 22,500 करोड़ रुपये के निवेश के दावे को लेकर सरकार को जवाब देना चाहिए।
तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार सरकार उद्योग विभाग और विभिन्न औद्योगिक समूहों के बीच करीब 51,500 करोड़ रुपये के निवेश संबंधी एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर होने का प्रचार कर रही है, लेकिन इससे पहले हुए दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश समझौतों की प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि पूर्व में हुए निवेश समझौतों का क्या परिणाम निकला और कितनी परियोजनाएं धरातल पर उतरीं।
नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि जिस कंपनी को लेकर सरकार निवेश की बात कर रही है, उसकी स्थापना फरवरी 2026 में हुई है और उसके पास मात्र 11 लाख रुपये की पूंजी है। उन्होंने कहा कि इतनी कम पूंजी वाली कंपनी द्वारा न्यूक्लियर पावर प्लांट या न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर जैसी बड़ी परियोजनाओं में हजारों करोड़ रुपये निवेश करने का दावा कई सवाल खड़े करता है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में बड़े उद्योग और निवेश का स्वागत होना चाहिए, लेकिन निवेश के नाम पर कागजी कंपनियों को बढ़ावा देने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि ऐसी कंपनियों को रियायती दर पर जमीन, सब्सिडी और अन्य सुविधाएं दी जाती हैं, तो इससे राज्य के संसाधनों के दुरुपयोग की आशंका बढ़ सकती है।
उन्होंने राज्य सरकार से पूछा कि आखिर ऐसी कंपनी के पास निवेश के लिए धन का स्रोत क्या है और उसकी वित्तीय क्षमता का आकलन किस आधार पर किया गया। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि संबंधित विभागों और अधिकारियों ने इस दावे की जांच-पड़ताल क्यों नहीं की।
तेजस्वी यादव ने सरकार पर निवेश के नाम पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार को वास्तविक निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास की जरूरत है, न कि केवल घोषणाओं और समझौतों की। उन्होंने सरकार से पूरे मामले पर विस्तृत स्पष्टीकरण देने की मांग की।
हालांकि, इस मामले में बिहार सरकार या संबंधित कंपनी की ओर से तेजस्वी यादव के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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