मधेपुरा: भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (BNMU) में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ा मामला अचानक गरमा गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार 11 अतिथि शिक्षकों द्वारा नियुक्ति के समय जमा किए गए अनुभव प्रमाणपत्रों के सत्यापन में उन्हें संबंधित संस्थानों से प्रमाणित नहीं किया गया। इसके बाद विश्वविद्यालय ने सभी 11 शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से अध्यापन कार्य से अलग कर दिया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित शिक्षकों से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। विश्वविद्यालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार यदि निर्धारित अवधि में जवाब नहीं दिया जाता है या प्राप्त स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो उनकी अतिथि शिक्षक के रूप में सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की जा सकती है।
नियुक्ति में अनुभव प्रमाणपत्र का था अहम रोल
कुलसचिव डॉ. अशोक कुमार सिंह की ओर से 9 सितंबर को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि संबंधित शिक्षकों ने नियुक्ति के दौरान जो अनुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए थे, उन्हीं के आधार पर उन्हें अंकभार दिया गया था और उसके बाद उनकी सेवा ली जा रही थी।
बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन प्रमाणपत्रों का संबंधित संस्थानों और विश्वविद्यालयों से सत्यापन कराया। प्राप्त सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय ने प्रमाणपत्रों को फर्जी बताया है।
अब तीन दिन में देना होगा जवाब
मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी संबंधित अतिथि शिक्षकों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया है। उन्हें कुलसचिव कार्यालय में तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण जमा करने का निर्देश दिया गया है।
जब तक मामले में अंतिम निष्कर्ष नहीं निकलता, तब तक इन शिक्षकों से किसी भी तरह का शैक्षणिक कार्य नहीं लेने का निर्देश दिया गया है। संबंधित विभागाध्यक्षों और प्राचार्यों को भी इस निर्णय की जानकारी शिक्षकों तक पहुंचाने तथा आदेश का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
किन-किन शिक्षकों के प्रमाणपत्र पर उठे सवाल?
विश्वविद्यालय की कार्रवाई में जिन 11 अतिथि शिक्षकों के अनुभव प्रमाणपत्रों का उल्लेख किया गया है, उनमें शामिल हैं—
- राज कुमार रजक — समाजशास्त्र, एसएनएसआरकेएस कॉलेज, सहरसा
- कुमारी पुष्पलता प्रिया — भूगोल, विश्वविद्यालय भूगोल विभाग
- सुरुचि चन्द्रा — जंतु विज्ञान, आरएम कॉलेज, सहरसा
- राहुल कश्यप — जंतु विज्ञान, एमएचएम कॉलेज, सोनवर्षा, सहरसा
- ब्यूटी कुमारी — राजनीतिशास्त्र, बीएनएमवी कॉलेज, साहुगढ़, मधेपुरा
- वीरभद्र — इतिहास, टीपी कॉलेज, मधेपुरा
- बिट्टू कुमार मिश्र — रसायनशास्त्र, आरएम कॉलेज, सहरसा
- मो. असरारुल हक — एआईएच, आरएम कॉलेज, सहरसा
- मनीष कुमार — भूगोल, एसएनएसआरकेएस कॉलेज, सहरसा
- शक्ति प्रसाद तिवारी — इतिहास, विश्वविद्यालय इतिहास विभाग
- अरविन्द कुमार — इतिहास, एसएनएसआरकेएस कॉलेज, सहरसा
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन शिक्षकों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। तीन दिनों के भीतर मिलने वाले स्पष्टीकरण और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद ही अंतिम कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।
यानी मामला अभी सीधे सेवा समाप्ति तक नहीं पहुंचा है, लेकिन विश्वविद्यालय के आदेश से इतना साफ है कि 11 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में इस्तेमाल किए गए अनुभव प्रमाणपत्रों की सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं और जांच पूरी होने तक उनसे अध्यापन कार्य नहीं लिया जाएगा।
BNMU के आधिकारिक अतिथि शिक्षक नियुक्ति दस्तावेजों में भी अनुभव प्रमाणपत्र समेत दस्तावेजों में किसी तरह की विसंगति या अनियमितता सामने आने पर कार्रवाई की शर्त दर्ज है।
अब सबकी नजर तीन दिन बाद जमा होने वाले स्पष्टीकरण और विश्वविद्यालय के अगले आदेश पर टिकी है।
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