बिहार की राजनीति में MLC चुनाव के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और मौजूदा मंत्री दीपक प्रकाश को NDA की ओर से उम्मीदवार नहीं बनाए जाने पर कांग्रेस ने बड़ा हमला बोला है। बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने तंज कसते हुए कहा कि “भाजपा ने दीपक का प्रकाश बुझा दिया है।”
कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी अपनी रणनीति के तहत किसी दूसरे कुशवाहा चेहरे को उभरने नहीं देना चाहती और यह फैसला उसी राजनीति का हिस्सा है। इस बयान के बाद सियासी माहौल और गर्म हो गया है।
दीपक प्रकाश फिलहाल बिना किसी सदन के सदस्य बने मंत्री हैं। संविधान के अनुसार, उन्हें 6 महीने के भीतर किसी सदन की सदस्यता लेनी जरूरी है। लेकिन MLC चुनाव में टिकट नहीं मिलने से उनके मंत्री पद पर संकट गहराता नजर आ रहा है।
इस मामले को लेकर कानूनी विवाद भी खड़ा हो गया है। दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाए जाने के खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें अनुच्छेद 164(4) का हवाला देते हुए सवाल उठाया गया है कि बिना सदस्य बने उन्हें मंत्री पद पर कैसे रखा गया।
वहीं, उपेंद्र कुशवाहा ने पूरे विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि उनकी NDA से कोई नाराजगी नहीं है। उन्होंने कहा कि “जब तक NDA चाहेगा, दीपक मंत्री बने रहेंगे। जरूरत पड़ने पर उन्हें किसी सदन का सदस्य बना दिया जाएगा।”
हालांकि, कुशवाहा के इस बयान ने सियासी अटकलों को और हवा दे दी है। सवाल उठ रहा है कि जब NDA के पास पर्याप्त संख्या है और 9 में से 8 सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही है, तो फिर दीपक प्रकाश को टिकट क्यों नहीं दिया गया।
राजनीतिक जानकार इसे NDA के अंदरूनी समीकरण और नेतृत्व संतुलन से जोड़कर देख रहे हैं। माना जा रहा है कि यह फैसला सिर्फ चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि गठबंधन के भीतर ताकत के संतुलन का संकेत भी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बात साफ कर दी है कि बिहार की सियासत में अभी और भी बड़े उलटफेर संभव हैं। अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि क्या दीपक प्रकाश अपना मंत्री पद बचा पाएंगे या यह विवाद उनके राजनीतिक करियर के लिए बड़ा झटका साबित होगा।
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