लखीसराय: +2 उच्च विद्यालय सदायबीघा, बड़हिया का मामला अब सिर्फ एक शिक्षक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे शिक्षा सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। कंप्यूटर साइंस के शिक्षक योगेश कुमार पर लगे गंभीर आरोप विभागीय और संघीय जांच में सही पाए गए—लेकिन हैरानी की बात यह है कि कार्रवाई अब तक अधर में लटकी हुई है।
आरोपों की सूची लंबी और गंभीर है—वरिष्ठ शिक्षकों से बदसलूकी, महिला शिक्षिकाओं के साथ अभद्र व्यवहार, छात्राओं के प्रति कठोर रवैया, यहां तक कि एक शिक्षक को मारने की धमकी देने तक की बात सामने आई है। सबसे संवेदनशील आरोप प्रधानाध्यापक के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी का है, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।
जांच के दौरान कई बार स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन हर बार जवाब “असंतोषजनक” बताया गया। सशरीर पूछताछ भी हुई, लेकिन वहां से भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बावजूद, एक साल बीत जाने के बाद भी ठोस कार्रवाई का अभाव सवाल खड़े कर रहा है।
इसी देरी को लेकर अब ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का गुस्सा फूट पड़ा है। उनका आरोप है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) यदुवंश राम जानबूझकर मामले को दबाए बैठे हैं। पिछले एक वर्ष से फाइलें आगे नहीं बढ़ रहीं, जिससे स्कूल की पढ़ाई और माहौल दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीणों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्कूल प्रबंधन समिति ने मिलकर सांसद को ज्ञापन सौंपा है। मांग साफ है—आरोपी शिक्षक पर तत्काल कार्रवाई हो और डीईओ को भी यहां से हटाया जाए। साथ ही डीईओ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
अब सवाल यही है—जब जांच में आरोप सही साबित हो चुके हैं, तो कार्रवाई में इतनी देरी क्यों? बड़हिया का यह मामला अब शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता की बड़ी बहस बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों को इंतजार है कि “कागजों की कार्रवाई” कब जमीन पर उतरती है।
बता दें कि डीईओ के खिलाफ +2 स्कूल सदायबीघा बड़हिया का यह पहला आक्रोश नहीं है, बल्कि जिले के कई और माध्यमिक,उच्च माध्यमिक एवं मध्य विद्यालयों में उनके लापरवाही से शैक्षणिक व्यवस्था पर लगातार प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
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