पटना: NEET विवाद को लेकर लंबे समय से चल रही सियासी लड़ाई में शनिवार को उस वक्त नया मोड़ आ गया, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बिहार कांग्रेस ने अपना विरोध कार्यक्रम ही बदल दिया। जिस कार्यक्रम में पहले कैंडल मार्च और श्रद्धांजलि सभा की तैयारी थी, वही कार्यक्रम अब विजय मार्च में बदल गया।
पटना के सदाकत आश्रम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया। कार्यकर्ता हाथों में पार्टी का झंडा लेकर पहुंचे और एक-दूसरे को गुलाल लगाकर खुशी जाहिर की। कई कार्यकर्ता ढोल की थाप पर नाचते नजर आए। पूरे परिसर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।
बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम के निर्देश पर राज्य के सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों और युवाओं की आवाज की जीत है।
कांग्रेस ने कहा कि NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के सम्मान की मांग को लेकर आंदोलन किया गया था। पार्टी ने दावा किया कि सरकार को छात्रों के दबाव के आगे झुकना पड़ा।
पटना में सदाकत आश्रम से निकलने वाले विजय मार्च को लेकर पुलिस बल की तैनाती की गई थी। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस मौके पर युवाओं के मुद्दों को आगे भी उठाते रहने की बात कही।
वहीं, राजनीतिक गलियारों में इस इस्तीफे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक तरफ कांग्रेस इसे छात्रों की जीत बता रही है, तो दूसरी तरफ सत्ता पक्ष की ओर से इस पर अलग प्रतिक्रिया आने की संभावना है। NEET विवाद अब सिर्फ परीक्षा व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।