शेखपुरा: हरोहर नदी के बढ़ते पानी से घाटकुसुम्भा प्रखंड के गांवों में बिगड़े हालात के बीच अब पूरे प्रखंड को बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग तेज हो गई है। बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर जिला बीस सूत्री सदस्य सह कांग्रेस नेता पप्पू राज मंडल और कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष अमीर राज मंडल ने जिलाधिकारी को आवेदन सौंपकर तत्काल राहत और स्थायी समाधान की मांग उठाई।
घाटकुसुम्भा में पिछले कई दिनों से बाढ़ का असर लगातार बढ़ा है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक सुजावलपुर, अकरपुर, गदबदिया, सहरा, बिलोनी, गुरेरा और बावघाट समेत कई गांव बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं, जबकि पानापुर पंचायत का सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है।
‘पानी में पूरा प्रखंड, फिर भी बाढ़ग्रस्त क्यों नहीं?’
जनता दरबार में दिए आवेदन में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि घाटकुसुम्भा के लगभग सभी गांव बाढ़ की मार झेल रहे हैं। कहीं आवागमन की परेशानी है तो कहीं भोजन, पेयजल, दवा और पशुओं के चारे का संकट खड़ा है। ऐसे में प्रभावित परिवारों को तत्काल सरकारी राहत की जरूरत है।
नेताओं का कहना है कि घाटकुसुम्भा के कई गांव हर साल बाढ़ की समस्या से जूझते हैं, लेकिन प्रखंड को बाढ़ग्रस्त क्षेत्र का दर्जा नहीं मिलने से प्रभावित परिवारों को आपदा राहत और मुआवजे का अपेक्षित लाभ मिलने में परेशानी होती है।
यह मांग ऐसे समय उठी है, जब हालिया निरीक्षणों में भी प्रशासन ने घाटकुसुम्भा के बाढ़ प्रभावित गांवों की स्थिति का जायजा लिया है।
सिर्फ राहत नहीं, अब स्थायी समाधान की मांग
कांग्रेस नेताओं ने पानापुर में पक्का डैम बनाने की मांग भी रखी है। उनका तर्क है कि इससे पानी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है और भविष्य में बाढ़ की समस्या को कम किया जा सकता है। साथ ही, सालभर पानी उपलब्ध रहने से किसानों को सिंचाई का फायदा मिलने की उम्मीद है।
यानी मांग सिर्फ इस बार के राहत पैकेज तक सीमित नहीं है। नेताओं ने हर साल दोहराई जाने वाली बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान की मांग उठाई है।
दवा से लेकर पशुचारे तक, राहत का पूरा पैकेज मांगा
बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए आवेदन में दवा, पशुचारा, फूड पैकेट और सूखा राशन उपलब्ध कराने की मांग की गई है। साथ ही प्रभावित इलाकों में सामुदायिक रसोई शुरू करने और सुरक्षित बाढ़ आश्रय स्थल उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई।
नेताओं ने प्रशासन से यह भी कहा कि राहत सामग्री का वितरण पारदर्शी तरीके से हो, ताकि वास्तविक जरूरतमंद परिवार सरकारी सहायता से वंचित न रहें।
अब गेंद प्रशासन के पाले में
घाटकुसुम्भा में बाढ़ की स्थिति को लेकर पहले भी ग्रामीणों ने नाव, दवा, पशुचारा और राहत सामग्री की मांग उठाई है। अब कांग्रेस नेताओं ने जिलाधिकारी के जनता दरबार में लिखित आवेदन देकर पूरे प्रखंड को बाढ़ग्रस्त घोषित करने की मांग रखी है।
सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि इस बार बाढ़ का पानी कब उतरेगा। बड़ा सवाल यह है कि हर साल पानी आने के साथ सामने आने वाली वही समस्याएं आखिर कब खत्म होंगी? प्रशासन के सामने तत्काल राहत के साथ-साथ पानापुर डैम जैसी स्थायी योजना पर भी ठोस पहल करने की चुनौती है।
एक नजर में प्रमुख मांगें
- घाटकुसुम्भा को तत्काल बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित किया जाए
- बाढ़ पीड़ितों को राहत और मुआवजा दिया जाए
- दवा, सूखा राशन और फूड पैकेट उपलब्ध हों
- पशुओं के लिए पर्याप्त चारा और दवा की व्यवस्था हो
- सामुदायिक रसोई शुरू की जाए
- सुरक्षित बाढ़ आश्रय स्थल बनाए जाएं
- पानापुर में पक्का डैम निर्माण की पहल हो
- बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान की योजना तैयार की जाए
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