किशनगंज: फरक्का जल संधि को लेकर बिहार की सियासत में बहस तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में किशनगंज में JDU ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गंगा के जल बंटवारे और बिहार के जल अधिकार का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। पार्टी नेताओं ने कहा कि मामला सिर्फ भारत-बांग्लादेश के बीच पानी के बंटवारे का नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध बिहार के भविष्य, सिंचाई, बाढ़ और जल उपलब्धता से भी है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में JDU जिलाध्यक्ष फैसल अहमद, ठाकुरगंज विधायक गोपाल अग्रवाल, पूर्व मंत्री नौशाद आलम और नगर परिषद अध्यक्ष इंदरदेव पासवान समेत कई नेता मौजूद रहे।
‘पहले बिहार का पानी, फिर कोई फैसला’ वाला संदेश
JDU नेताओं ने कहा कि 1996 की भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि के नवीनीकरण के समय बिहार के मौजूदा ही नहीं, बल्कि आने वाले दशकों की पानी की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। पार्टी पहले ही 2050 तक बिहार की जल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए संधि की समीक्षा की मांग उठा चुकी है।
1996 की संधि 12 दिसंबर 2026 को 30 वर्ष पूरे करेगी, जिसके बाद इसके नवीनीकरण को लेकर चर्चा महत्वपूर्ण हो गई है। भारत सरकार के संसदीय जवाब के मुताबिक दोनों देशों के बीच संधि के नवीनीकरण पर औपचारिक बातचीत अभी शुरू नहीं हुई थी, जबकि केंद्र ने विभिन्न हितधारकों से इनपुट लिए हैं।
गंगा का पानी, बाढ़ और गाद… JDU ने जोड़ा पूरा मुद्दा
JDU नेताओं का कहना है कि फरक्का से जुड़े फैसले का असर बिहार में गंगा के प्रवाह, गाद जमाव, नदी की क्षमता और बाढ़ जैसी समस्याओं पर पड़ता है। पार्टी का तर्क है कि बिहार की बदलती आबादी, कृषि जरूरत और भविष्य की जल मांग को देखते हुए पुरानी व्यवस्था को उसी रूप में आगे बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा।
हाल के दिनों में JDU ने इस मुद्दे को लेकर राज्य के गंगा किनारे के जिलों में ‘नीतीश संवाद’ अभियान भी चलाया है, जिसका उद्देश्य स्थानीय लोगों, किसानों और विशेषज्ञों से राय लेकर बिहार के जल हितों को सामने रखना है।
अब पानी सिर्फ नदी का मुद्दा नहीं, सियासत का भी केंद्र
किशनगंज की प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए JDU ने यह संदेश देने की कोशिश की कि फरक्का जल संधि पर होने वाली किसी भी भविष्य की बातचीत में बिहार की जरूरत और जल अधिकार को नजर-अंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
पार्टी का कहना है कि बिहार के लिए पानी का सवाल आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण होने वाला है। ऐसे में संधि के नवीनीकरण से पहले राज्य के हितों, जल उपलब्धता और भविष्य की जरूरतों पर व्यापक विचार जरूरी है।
फरक्का जल संधि की मियाद खत्म होने में अब कुछ ही महीने बाकी हैं। ऐसे में किशनगंज से उठी JDU की यह आवाज आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में कितना बड़ा मुद्दा बनती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
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किशनगंज से रज़ी अहमद कि रिपोर्ट…