भागलपुर: बाढ़ ने जब रास्ते रोक दिए और सामान्य वाहनों की आवाजाही मुश्किल हो गई, तब शाहकुंड की अंचलाधिकारी डॉ. हर्षा कोमल ने दफ्तर तक सीमित रहने के बजाय खुद प्रभावित इलाकों का रुख किया। राहत सामग्री लेकर ट्रैक्टर पर सवार होकर गांवों तक पहुंचती सीओ की तस्वीर अब इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोग उन्हें प्यार से ‘ट्रैक्टर वाली मैडम’ कह रहे हैं।
शाहकुंड प्रखंड की कई पंचायतें बाढ़ की चपेट में हैं। सड़कें जलमग्न होने के कारण कई जगह सामान्य चारपहिया वाहनों से पहुंचना मुश्किल हो गया है। ऐसे में प्रशासन ने ट्रैक्टर के जरिए सूखा राशन, पॉलिथीन शीट और अन्य राहत सामग्री प्रभावित इलाकों तक पहुंचाने का रास्ता अपनाया। सीओ हर्षा कोमल खुद इस अभियान की निगरानी करते हुए ट्रैक्टर से गांवों तक पहुंच रही हैं।

ट्रैक्टर से गांव, जरूरत पड़ी तो पानी में पैदल
कई स्थानों पर जब ट्रैक्टर से आगे बढ़ना भी आसान नहीं रहा, तो सीओ पानी में उतरकर प्रभावित लोगों तक पहुंचीं और उनकी समस्याएं सुनीं। बुधवार और गुरुवार को उन्होंने शाहकुंड के कई बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर राहत व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान स्थानीय लोगों से सीधे बातचीत कर उनकी जरूरतों की जानकारी ली गई।
ग्रामीणों के बीच उनकी इस सक्रियता की चर्चा होने लगी। राहत सामग्री लेकर ट्रैक्टर के साथ पहुंचने वाली अधिकारी को देखकर लोग उन्हें ‘ट्रैक्टर वाली मैडम’ कहकर बुलाने लगे।

30 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित
सीओ डॉ. हर्षा कोमल के अनुसार शाहकुंड प्रखंड में करीब 30 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। चार पंचायतें पूरी तरह और दो पंचायतों के कुछ गांव बाढ़ की चपेट में बताए गए हैं। प्रभावित इलाकों में सूखा राशन और पॉलिथीन शीट समेत जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत के साथ स्वास्थ्य सेवाओं पर भी प्रशासन का जोर है। प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर लगाए गए हैं और पचरुखी में 24 घंटे संचालित होने वाला स्वास्थ्य कैंप भी बनाया गया है, जहां चिकित्सक और दवाएं उपलब्ध रहने की बात कही गई है।

सामुदायिक किचन से मिल रहा भोजन
बाढ़ पीड़ितों के लिए सामुदायिक किचन भी संचालित किए जा रहे हैं। शाहकुंड में राहत अभियान के शुरुआती चरण में चार स्थानों पर सामुदायिक रसोई शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई थी। बाद की रिपोर्टों में प्रभावित इलाकों में किचन की संख्या बढ़ने की बात कही गई है।
सीओ ने सामुदायिक किचन पहुंचकर भोजन की व्यवस्था का जायजा भी लिया। प्रशासन का प्रयास है कि बाढ़ के कारण घरों से निकलने में असमर्थ लोगों तक राहत और भोजन की सुविधा पहुंचाई जा सके।

बाढ़ ने बदली प्रशासन की ‘फील्ड ड्यूटी’
शाहकुंड की तस्वीर इस बात का उदाहरण बन रही है कि आपदा के दौरान प्रशासनिक कामकाज सिर्फ कार्यालय से निर्देश देने तक सीमित नहीं रहता। जब सड़कें पानी में डूब जाएं और सामान्य वाहन प्रभावित गांवों तक न पहुंच सकें, तब अधिकारियों को भी राहत टीम के साथ मैदान में उतरना पड़ता है।
भागलपुर जिले में बाढ़ की स्थिति फिलहाल गंभीर बनी हुई है और शाहकुंड भी प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में सीओ हर्षा कोमल का प्रभावित इलाकों में लगातार दौरा और राहत कार्यों की निगरानी स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
‘ट्रैक्टर वाली मैडम’ की कहानी इसलिए भी अलग है क्योंकि यहां चर्चा सिर्फ एक अधिकारी की तस्वीर की नहीं, बल्कि बाढ़ के बीच राहत को उन लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की है, जिनके लिए सामान्य रास्ते ही बंद हो चुके हैं।
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