पटना की सियासत इन दिनों हर घंटे नया रंग बदल रही है। सत्ता के गलियारों से निकल रही ताजा जानकारी ने राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर यह है कि बिहार में लंबे इंतजार के बाद 30 अप्रैल 2026 को मंत्रिमंडल विस्तार लगभग तय माना जा रहा है।
सूत्र बताते हैं कि पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को मतदान खत्म होते ही बिहार सरकार फुल एक्शन मोड में आ जाएगी और उसी के अगले दिन यानी 30 अप्रैल की शाम तक कैबिनेट विस्तार पर मुहर लग सकती है। पहले 6 मई की चर्चा थी, लेकिन अब अचानक तारीख आगे खिसकने से सियासी हलचल और तेज हो गई है।
सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब विश्वासमत जीतने के अगले ही दिन पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अचानक 1, अणे मार्ग पहुंच गए और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से बंद कमरे में लंबी बातचीत की। यह मुलाकात भले औपचारिक बताई जा रही हो, लेकिन अंदरखाने की खबर कुछ और ही कहानी कह रही है।
सूत्रों का दावा है कि इस बैठक में कैबिनेट विस्तार के फॉर्मूले पर फाइनल चर्चा हुई और सीटों के बंटवारे से लेकर चेहरों तक पर सहमति बन गई है। इस मुलाकात में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ़ ललन सिंह की मौजूदगी ने इस अटकल को और मजबूत कर दिया कि— अब खेल पूरी तरह सेट हो चुका है।
ट्विस्ट यहीं खत्म नहीं होता। इससे पहले नीतीश कुमार ने डिप्टी सीएम के आवास पर भी जाकर मुलाकात की। बैक-टू-बैक बैठकों ने यह साफ कर दिया कि NDA के भीतर जो भी मतभेद थे, उन्हें सुलझा लिया गया है और अब सबकी नजर सिर्फ विस्तार पर है।
सूत्रों की मानें तो कैबिनेट विस्तार में सबसे बड़ी चुनौती सहयोगी दलों के बीच संतुलन बनाने की थी। बीजेपी, जद(यू) और अन्य NDA सहयोगियों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर अंदरखाने खींचतान चल रही थी। लेकिन अब यह जिम्मेदारी खुद सम्राट चौधरी ने संभाल ली है। कहा जा रहा है कि—“सम्राट ही वो चेहरा हैं जो सबको साथ लेकर चल सकते हैं।”
इसी बीच एक और बड़ी जानकारी सामने आ रही है कि कैबिनेट विस्तार में नए चेहरों को मौका मिल सकता है, जबकि कुछ पुराने मंत्रियों की छुट्टी भी तय मानी जा रही है। यानी यह विस्तार सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि पूरी सरकार के ‘रीसेट’ जैसा हो सकता है।
विधानसभा में विश्वासमत के दौरान सम्राट चौधरी के तेवर ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि वे अब पूरी तरह कंट्रोल में हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि नीतीश कुमार को कोई हटा नहीं सकता और वे उनके मार्गदर्शन में ही बिहार को आगे ले जाएंगे। इस बयान के बाद यह लगभग तय हो गया कि नीतीश-सम्राट के बीच तालमेल पूरी तरह मजबूत है।
दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के साथ सदन में हुई तीखी नोकझोंक ने यह साफ कर दिया कि बिहार की अगली बड़ी राजनीतिक लड़ाई अब इन्हीं दो चेहरों के बीच होने वाली है।
राजनीति के बीच एक और दिलचस्प मोड़ यह है कि सम्राट चौधरी धार्मिक दौरे पर भी सक्रिय दिख रहे हैं। वे पुनौराधाम मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करेंगे और संतों का आशीर्वाद लेंगे। इसे भी राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है—जहां सत्ता और आस्था दोनों को साधने की कोशिश दिख रही है। इधर, पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा परिजनों संग उज्जैन में महाकाल के दरबार में पहुंचे।
सूत्रों का यह भी कहना है कि कैबिनेट विस्तार में हो रही देरी से सरकार के कई काम प्रभावित हो रहे थे। कई विभाग बिना मंत्री के फैसले लेने में असमर्थ हैं, जिससे प्रशासनिक गति धीमी पड़ गई है। यही वजह है कि अब आलाकमान ने भी जल्द से जल्द विस्तार के लिए हरी झंडी दे दी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या 30 अप्रैल को ही बिहार को नई कैबिनेट मिलेगी?
या फिर आखिरी वक्त पर फिर कोई नया ट्विस्ट आएगा?
फिलहाल जो संकेत मिल रहे हैं, वो साफ हैं—बिहार की सियासत इस वक्त “स्टेबल” नहीं, बल्कि “सस्पेंस थ्रिलर” बन चुकी है… जहां हर दिन एक नया ट्विस्ट सामने आ रहा है।
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