पटना: ‘रिशु श्री’ मामले को लेकर बिहार की राजनीति में घमासान तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को निशाने पर लेते हुए 20 तीखे सवाल पूछे।
तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार की जनता अब जवाब चाहती है। जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली सरकार बताए कि आखिर इस मामले में बड़े लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे प्रकरण में सीएमओ से लेकर कई बड़े अधिकारी शामिल हैं, लेकिन जांच एजेंसियां निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय आरोपियों को बचाने का काम कर रही हैं।
वित्तीय स्थिति पर चिंता जताते हुए तेजस्वी ने कहा कि आकस्मिक निधि से 3 हजार करोड़ रुपये से अधिक की निकासी इस बात का संकेत है कि राज्य वित्तीय संकट की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार की नीतियों को अदूरदर्शी बताते हुए कहा कि बिहार कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव ने टेंडर प्रक्रिया, कथित कमीशनखोरी, जांच में देरी और चार्जशीट में बड़े नामों के गायब होने जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि आखिर कैसे एक मामूली ठेकेदार इतना प्रभावशाली हो गया कि वह टेंडर तय करने लगा। ईडी जांच में सामने आए तथ्यों पर क्या कार्रवाई हुई, यह भी उन्होंने जानना चाहा।
तेजस्वी ने कहा कि 4000 पन्नों की चार्जशीट में केवल 7 अभियुक्तों को शामिल किया गया है, जबकि किसी मंत्री या वरिष्ठ अधिकारी का नाम नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे अधिकारियों पर कार्रवाई कर बड़े लोगों को बचाया जा रहा है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब सरकार को मामले की जानकारी थी, तो एफआईआर दर्ज करने में देरी क्यों की गई। क्या सबूत मिटाने की कोशिश हुई? इसके साथ ही उन्होंने विदेशी यात्राओं, टेंडर आवंटन और विभागीय जवाबदेही पर भी सवाल खड़े किए।
तेजस्वी यादव ने दावा किया कि उनकी सरकार के दौरान ऐसे मामलों को लेकर लगातार दबाव बनाया गया था, जिसके कारण राजनीतिक तनाव बढ़ा और अंततः उन्हें सत्ता से बाहर होना पड़ा।
फिलहाल ‘रिशु श्री’ मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों और सवालों का क्या जवाब देती है।
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