नालंदा: नालंदा के मोरा तालाब में सोमवार रात आयोजित एक भव्य अभिनंदन समारोह में पूर्व सांसद आनंद मोहन ने बिहार की राजनीति पर खुलकर अपनी राय रखी। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, हालिया सत्ता परिवर्तन, एनडीए की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई तीखे सवाल उठाए।
कार्यक्रम में सैकड़ों समर्थकों की मौजूदगी के बीच आनंद मोहन ने कहा कि नीतीश कुमार उनके नेता नहीं, बल्कि बड़े भाई जैसे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों जेपी आंदोलन से निकले हुए नेता हैं और उनके बीच रिश्ता राजनीतिक नहीं बल्कि पारिवारिक है।
उन्होंने कहा, “मैं उनका चमचा नहीं, भाई हूं और भाई को भाई से ज्यादा मोहब्बत होती है।”
आनंद मोहन ने बिहार में हाल के राजनीतिक बदलावों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब एनडीए की ओर से “2025 से 30, फिर से नीतीश” जैसे नारे दिए जा रहे थे और सरकार सुचारू रूप से चल रही थी, तो अचानक ऐसा क्या हुआ कि मुख्यमंत्री बदल दिए गए या स्थिति बदल गई।
उन्होंने इसे लोकतंत्र और जनादेश का अपमान बताते हुए कहा कि जनता के फैसले के साथ इस तरह का बदलाव सही संदेश नहीं देता।
बिना किसी का नाम लिए उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे कुछ लोग अपने प्रभाव का दुरुपयोग कर आर्थिक साम्राज्य खड़ा कर रहे हैं, जबकि पार्टी के लिए वर्षों से काम करने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है।
अपने ऊपर लगने वाले “परिवारवाद” के आरोपों को खारिज करते हुए आनंद मोहन ने कहा कि अगर उन्हें केवल परिवार का ही लाभ लेना होता, तो वे सक्रिय राजनीति में संघर्ष नहीं करते। उन्होंने कहा कि उनके परिवार में पहले से ही कई लोग सांसद और विधायक हैं, फिर भी उन्होंने अलग रास्ता चुना।
आरा में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे न तो बुलडोजर संस्कृति के समर्थक हैं और न ही एनकाउंटर संस्कृति के।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति को सजा देने का अधिकार केवल न्यायपालिका को है। पुलिस का काम अपराधियों को गिरफ्तार कर अदालत के सामने पेश करना है, न कि खुद सजा देना।
इस मौके पर अविनाश सिंह, अंकित सिंह, अजय सिंह, विक्की सिंह, सुरेंद्र सिंह, राजन सिंह, बिट्टू सिंह, मुनचुन सिंह, राजवीर सिंह, चंदन सिंह, शुभम सिंह, नीतीश कुमार उर्फ पिंटू, अजीत सिंह सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
नालंदा के इस कार्यक्रम में आनंद मोहन के बयान ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उनके बयानों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
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