मधेपुरा: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर मधेपुरा में जिला प्रशासन की ओर से भव्य कैंडल मार्च निकाला गया। हाथों में जलती मोमबत्तियां और दिलों में देश की एकता, अखंडता एवं भाईचारे का संदेश लिए सैकड़ों लोग इस मार्च में शामिल हुए। कार्यक्रम ने 1947 के विभाजन की दर्दनाक यादों को ताजा करते हुए समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया।
मधेपुरा समाहरणालय परिसर से शुरू हुआ कैंडल मार्च शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए बी.पी. मंडल चौक पहुंचा। जैसे-जैसे मार्च आगे बढ़ता गया, लोगों की भागीदारी भी बढ़ती गई। मोमबत्तियों की रोशनी केवल सड़कों को ही नहीं, बल्कि इतिहास के उस दर्दनाक अध्याय को भी याद दिला रही थी, जब विभाजन की त्रासदी में लाखों लोगों ने अपने घर, परिवार और अपनों को खो दिया था।
बी.पी. मंडल चौक पर विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं को नमन किया और देश की एकता एवं अखंडता को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।
कैंडल मार्च में प्रभारी मंत्री शीला मंडल, जिलाधिकारी अभिषेक रंजन, पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह, अपर समाहर्ता अरुण कुमार सिंह, कला संस्कृति पदाधिकारी आम्रपाली, जदयू जिलाध्यक्ष गुड्डी देवी, समाजसेवी डॉ. भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी, शौकत अली सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि 1947 का विभाजन केवल भूगोल का बंटवारा नहीं था, बल्कि लाखों परिवारों के दर्द, विस्थापन और बिछड़ने की त्रासदी भी था। इतिहास के उस दुखद दौर को याद करने का उद्देश्य किसी के मन में कटुता पैदा करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को यह संदेश देना है कि नफरत और हिंसा का परिणाम हमेशा विनाशकारी होता है।
वक्ताओं ने कहा कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। विभिन्न धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों के बावजूद एकता के सूत्र में बंधे रहना ही भारतीय लोकतंत्र और समाज की सबसे बड़ी पहचान है। विभाजन की पीड़ा से सीख लेकर समाज में प्रेम, भाईचारा और सद्भाव को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।
मधेपुरा का यह कैंडल मार्च इतिहास की पीड़ा को याद करते हुए वर्तमान और भविष्य के भारत को एकता, शांति और मानवता का संदेश देने का माध्यम बना।
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