शेखपुरा: हरोहर नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने शेखपुरा के घाटकुसुम्भा प्रखंड में बाढ़ का संकट गहरा दिया है। खेतों और संपर्क मार्गों के बाद अब बाढ़ का पानी कई गांवों के घरों तक पहुंच गया है। करीब 22 गांवों के प्रभावित होने की बात सामने आ रही है, जबकि लगभग 1100 हेक्टेयर कृषि भूमि के जलमग्न होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
पानापुर पंचायत की स्थिति सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बताई जा रही है। बाढ़ के पानी से सड़क संपर्क प्रभावित होने के कारण ग्रामीणों के सामने आवागमन की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती बन गया है। कई जगहों पर अब नाव ही ग्रामीणों के लिए आवाजाही का मुख्य साधन रह गई है।

पुल डूबा, सात हजार की आबादी का संपर्क प्रभावित
बाउंघाट-पानापुर के बीच बना पुल बाढ़ के पानी में डूब गया है। इसके कारण पानापुर, प्राणपुर, हरिनामचक, जितपारपुर, मोहम्मदपुर और आलापुर समेत कई गांवों की करीब सात हजार आबादी के जिला और प्रखंड मुख्यालय से संपर्क पर असर पड़ा है।
ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर इलाज और जरूरी सामान की व्यवस्था तक मुश्किल हो गई है। कई परिवार बच्चों, पशुओं, अनाज और जरूरी सामान के साथ सुरक्षित व ऊंचे स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं।

घरों में घुसा पानी, खेतों में डूबी फसल
हरोहर का पानी निचले इलाकों में तेजी से फैल रहा है। कई घरों में पानी प्रवेश कर चुका है। हजारों एकड़ में लगी धान समेत अन्य फसलें पानी में डूब गई हैं। करीब 1100 हेक्टेयर कृषि भूमि के जलमग्न होने की बात सामने आने के बाद किसानों को भारी फसल क्षति की आशंका है।
डीहकुसुम्भा गांव के निचले खंधे में पानी भरने के बाद किसान अपनी फसल बचाने के लिए खुद मोर्चा संभाल रहे हैं। शिवशंकर पंडित, महेंद्र यादव, पंकज राम, कैलू यादव, पिंटू यादव और कलेसर साव समेत कई किसान ट्रैक्टर से मिट्टी मंगाकर बांध तैयार कर रहे हैं। ग्रामीण दिन-रात पानी की धार रोकने में जुटे हैं। हालांकि, हरोहर की तेज धार के सामने उनका प्रयास कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है।

राहत के नाम पर नाव, ग्रामीणों ने मांगी और मदद
बाढ़ बढ़ने के साथ ग्रामीणों की शिकायतें भी बढ़ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि फिलहाल राहत के नाम पर मुख्य रूप से नावों का परिचालन ही दिखाई दे रहा है। सीओ राकेश कुमार के अनुसार बटौरा, सहरा और अकरपुर में सरकारी नाव तैनात की गई है।
ग्रामीणों का दावा है कि दो दर्जन से अधिक घरों में पानी प्रवेश कर चुका है, लेकिन कई प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री नहीं पहुंची है। ग्रामीणों ने भोजन, दवा, पशु चारा और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था बढ़ाने की मांग की है।

पानापुर में इलाज भी बना चुनौती
बाढ़ से घिरी पानापुर पंचायत में हालात और गंभीर हैं। सड़क संपर्क प्रभावित होने के कारण बीमार लोगों को इलाज के लिए बाहर ले जाना मुश्किल हो गया है। ग्रामीण सुरेंद्र महतो के अनुसार उनकी पत्नी कई दिनों से बुखार से पीड़ित हैं, लेकिन गांव से बाहर निकलने का रास्ता बाधित होने के कारण इलाज कराने में परेशानी हो रही है।
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ऐसे हालात में गंभीर मरीजों के लिए परेशानी और बढ़ सकती है।

कमर तक पानी में चलकर स्वास्थ्य सेवा देने पहुंच रही एएनएम
बाढ़ के बीच स्वास्थ्यकर्मियों की जिम्मेदारी भी चुनौतीपूर्ण हो गई है। पानापुर उप स्वास्थ्य केंद्र की एएनएम संध्या कुमारी के अनुसार सोमे नदी के पुल पर पानी भर गया है। इसके बावजूद वह कमर तक पानी में होकर केंद्र पहुंच रही हैं, ताकि मरीजों को समय पर दवा मिल सके।
बाढ़ के बीच पानी पार करती एएनएम की तस्वीरें इस संकट के बीच स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने के संघर्ष की कहानी कहती हैं।

विधायक ने किया दौरा, अधिकारियों को दिए निर्देश
बाढ़ की स्थिति के बीच शेखपुरा विधायक रंधीर कुमार सोनी ने कोयला, बाउंघाट, भदौसी और डीहकुसुम्भा समेत प्रभावित इलाकों का दौरा किया। उन्होंने ग्रामीणों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं।
ग्रामीणों ने नाव, पशु चारा, दवा, डॉक्टर, स्वास्थ्य सुविधा और राहत सामग्री की मांग रखी। विधायक ने सीओ, बीडीओ और संबंधित अधिकारियों से समन्वय कर प्रभावित परिवारों के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को स्थिति पर लगातार नजर रखने और जरूरत के अनुसार त्वरित सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

बाढ़ के बीच बच्चों की पढ़ाई भी जारी
इस संकट के बीच अकरपुर गांव के बच्चों का पढ़ाई के प्रति जज्बा भी सामने आया है। गांव से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित कुसुम्भा घाट मध्य विद्यालय तक पहुंचने के लिए बच्चे नाव का सहारा ले रहे हैं। चारों ओर पानी और जोखिम के बावजूद बच्चों ने स्कूल जाना नहीं छोड़ा है।
उफनती हरोहर को पार कर स्कूल पहुंचते बच्चों की तस्वीरें बताती हैं कि बाढ़ ने रास्ते जरूर रोक दिए हैं, लेकिन पढ़ने की उनकी इच्छा को नहीं रोक पाई है।

अब सबसे बड़ा सवाल—राहत कितनी जल्दी पहुंचेगी?
हरोहर का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और निचले इलाकों में पानी फैलता जा रहा है। घर, खेत, सड़क और संपर्क मार्ग प्रभावित हैं। किसानों को फसल बचाने की चिंता है, ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन की, मरीजों को इलाज की और परिवारों को भोजन-पानी की।
घाटकुसुम्भा की बाढ़ अब सिर्फ जलभराव की समस्या नहीं रह गई है। यह आवागमन, स्वास्थ्य, खेती, पशुधन और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा बड़ा संकट बनती जा रही है। ऐसे में प्रभावित गांवों में राहत और बचाव कार्य कितनी तेजी से पहुंचता है, यही सबसे अहम सवाल है।
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