गोपालगंज: बिहार में पुलिस व्यवस्था को आधुनिक और हाईटेक बनाने के दावों के बीच गोपालगंज के भोरे थाने की तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है। हालात ऐसे हैं कि कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले पुलिसकर्मी खुद जर्जर भवन और टपकती छत के नीचे ड्यूटी करने को मजबूर हैं। बारिश होते ही थाना परिसर की बदहाली खुलकर सामने आ जाती है, जहां फाइलों से लेकर पुलिसकर्मियों की सुरक्षा तक संकट में पड़ जाती है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि यह थाना उसी भोरे विधानसभा क्षेत्र में स्थित है, जिसका प्रतिनिधित्व बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग मंत्री सुनील कुमार करते हैं। मंत्री सुनील कुमार पूर्व में बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के महानिदेशक (डीजी) भी रह चुके हैं। इसके बावजूद उनके अपने क्षेत्र का थाना भवन वर्षों से बदहाली की मार झेल रहा है।
करीब 46 वर्ष पुराने थाना भवन की दीवारें कमजोर हो चुकी हैं और छत जगह-जगह से टपकती है। बारिश के दौरान पानी सीधे कमरों में भर जाता है, जिससे महत्वपूर्ण केस डायरी, सरकारी दस्तावेज और रिकॉर्ड भीगकर खराब हो रहे हैं। पुलिसकर्मी हर दिन हादसे की आशंका के बीच काम कर रहे हैं।
थाने की स्थिति सिर्फ भवन तक सीमित नहीं है। परिसर में जलजमाव और गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक हर साल कई पुलिसकर्मी डेंगू और अन्य मौसमी बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में जवानों को कानून-व्यवस्था के साथ-साथ अपनी सेहत की लड़ाई भी लड़नी पड़ रही है।
चौंकाने वाली बात यह है कि कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी समय-समय पर थाना परिसर का निरीक्षण कर चुके हैं। जर्जर भवन की रिपोर्ट भी कई बार भेजी जा चुकी है, लेकिन अब तक नए भवन निर्माण या व्यापक मरम्मत की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सुरक्षा देने वाली खाकी ही असुरक्षित माहौल में काम करने को मजबूर हो, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। अब पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों की मांग है कि भोरे थाने के लिए जल्द नया भवन बनाया जाए, ताकि कानून की रक्षा करने वाले जवान सुरक्षित वातावरण में अपनी जिम्मेदारियां निभा सकें।
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