पटना: बिहार में संगठित अपराध, जमीन माफिया, पेपर लीक गिरोह और आर्थिक अपराधियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने राज्यभर में अपना नेटवर्क मजबूत करते हुए सभी 12 पुलिस रेंज में विशेष सेल गठित करने का फैसला लिया है। साथ ही प्रत्येक जिले में ईओयू के एक-एक इंस्पेक्टर की तैनाती की गई है।
ईओयू के एडीजी डॉ. अमित कुमार जैन के अनुसार, अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करने वाले 256 कुख्यात अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) के तहत कार्रवाई के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को प्रस्ताव भेजा गया है। इनमें कई बड़े अपराधी और संगठित गिरोह संचालक शामिल हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, केवल 12 जून 2026 के बाद से ही 10 बड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव भेजा गया है। जांच में इनके पास करीब 108.93 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति का पता चला है।
जमीन माफिया और अपराधियों पर शिकंजा
हाल के दिनों में ईओयू ने कई बड़ी कार्रवाई की हैं। नालंदा के चर्चित जमीन माफिया संतोष डाउन के 25 ठिकानों पर छापेमारी कर लाखों रुपये नकद और बड़ी संख्या में जमीन के दस्तावेज बरामद किए गए। वहीं जमुई के गुड्डू यादव के ठिकानों से नकदी, जमीन के कागजात और सरकारी अभिलेख बरामद होने का दावा किया गया है।
सीमा क्षेत्रों में विशेष निगरानी
नेपाल और पश्चिम बंगाल से सटी बिहार की सीमाओं पर तस्करी तथा आर्थिक अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए 8 जिलों के 14 पुलिस अनुमंडलों में बॉर्डर इकोनॉमिक इंटेलिजेंस यूनिट का गठन किया गया है। इसके अलावा नकली ब्रांड और फर्जी उत्पादों के कारोबार पर कार्रवाई के लिए बौद्धिक संपदा अपराध शाखा भी बनाई गई है।
इन चर्चित मामलों पर भी नजर
ईओयू की निगाह अब कई बड़े मामलों पर है। सूत्रों के अनुसार, पेपर लीक माफिया संजीव मुखिया और गोल्ड रॉबरी किंग सुबोध सिंह की संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
अधिकारियों का मानना है कि केवल गिरफ्तारी से अपराधी गिरोह खत्म नहीं होते। उनकी आर्थिक ताकत खत्म करना ज्यादा प्रभावी रणनीति है। इसी सोच के तहत अब अपराधियों की अवैध कमाई और बेनामी संपत्तियों पर सीधा प्रहार किया जा रहा है।
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