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Bihar नगर निगम ने अपने ही मेयर को थमा दिया नोटिस, पटना में 27 हजार संपत्तियों की खुलने लगी फाइल; 24 घंटे में जवाब नहीं तो सीलिंग का खतरा!

पटना: राजधानी पटना में इन दिनों नगर निगम की एक कार्रवाई ने सबसे ज्यादा चर्चा पैदा कर दी है। वजह...

पटना: राजधानी पटना में इन दिनों नगर निगम की एक कार्रवाई ने सबसे ज्यादा चर्चा पैदा कर दी है। वजह सिर्फ यह नहीं कि करीब 27 हजार संपत्ति मालिकों और गैर-आवासीय उपयोगकर्ताओं को नोटिस भेजा गया है, बल्कि इस सूची में पटना नगर निगम की मेयर सीता साहू का नाम भी शामिल है। यानी जिस नगर निगम की जिम्मेदारी शहर की व्यवस्था संभालने की है, उसी निगम ने अपनी मेयर की संपत्ति के इस्तेमाल को लेकर भी जवाब मांगा है।

यह कार्रवाई आवासीय संपत्तियों के कथित तौर पर व्यावसायिक या गैर-आवासीय इस्तेमाल को लेकर की जा रही है। नगर निगम अब यह जांच रहा है कि कागजों पर जिन संपत्तियों का उपयोग आवासीय है, उनका जमीन पर इस्तेमाल किस रूप में हो रहा है।

मामला सिर्फ मेयर का नहीं, 27 हजार संपत्तियों की जांच

इस कार्रवाई को केवल मेयर सीता साहू से जोड़कर देखना तस्वीर का छोटा हिस्सा होगा। असल में नगर निगम की कार्रवाई का दायरा करीब 27 हजार संपत्तियों तक पहुंच गया है।

निगम की ओर से चिन्हित संपत्तियों के मालिकों, निर्माताओं और गैर-आवासीय उपयोगकर्ताओं से जवाब मांगा जा रहा है। उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि उनकी संपत्ति का मौजूदा इस्तेमाल स्वीकृत नक्शे और निर्धारित भूमि उपयोग के अनुरूप है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई कार्रवाई

पूरे मामले की पृष्ठभूमि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से जुड़ी है। अदालत की निगरानी में आवासीय क्षेत्रों में गैर-आवासीय गतिविधियों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठे हैं। इसके बाद नगर निगम ने वार्डवार सर्वे कराकर ऐसी संपत्तियों को चिन्हित करना शुरू किया, जहां आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल की जानकारी मिली।

नगर निगम की कार्रवाई का उद्देश्य यह पता लगाना है कि नियमों के मुताबिक स्वीकृत उपयोग और जमीन पर वास्तविक इस्तेमाल में अंतर तो नहीं है।

24 घंटे में जवाब, नहीं तो बढ़ सकती है मुश्किल

नोटिस पाने वालों के लिए सबसे अहम बात जवाब की समय-सीमा है। रिपोर्ट के अनुसार संबंधित लोगों से 24 घंटे के भीतर आवश्यक दस्तावेज और संपत्ति के इस्तेमाल से संबंधित जानकारी देने को कहा गया है।

यदि संबंधित पक्ष जवाब नहीं देता या अपने पक्ष में पर्याप्त दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाता है, तो नगर निगम आगे की कार्रवाई कर सकता है। इसमें कथित गैर-आवासीय इस्तेमाल वाले हिस्से को सील करने और जुर्माना लगाने जैसी कार्रवाई शामिल हो सकती है।

मेयर के साथ उनके परिवार का नाम भी

इस कार्रवाई में सिर्फ मेयर सीता साहू का नाम ही सामने नहीं आया है। रिपोर्ट के अनुसार बड़ी पटनदेवी और महाराजगंज से संबंधित संपत्ति को लेकर उनके दोनों बेटों शिशिर कुमार और सुशांत कुमार को भी नोटिस भेजे जाने की जानकारी है। हालांकि शिशिर कुमार की ओर से संबंधित परिसर के आवासीय इस्तेमाल में होने की बात कही गई है।

यहां यह समझना जरूरी है कि नोटिस मिलना नियम उल्लंघन का अंतिम प्रमाण नहीं है। नोटिस का उद्देश्य संबंधित पक्ष से जवाब और दस्तावेज हासिल करना भी है।

पटना के कई बड़े इलाके जांच के दायरे में

नगर निगम की कार्रवाई एक-दो मोहल्लों तक सीमित नहीं है। कंकड़बाग, मुसल्लहपुर, बाजार समिति, गुलजारबाग, पटनदेवी, दीदारगंज, मारूफगंज, पाटलिपुत्र कॉलोनी, कृष्णापुरी, एसकेपुरी, एजी कॉलोनी, आशियाना, विजय नगर, मंदिरी और लोदीपुर समेत कई इलाकों में संपत्तियों को चिन्हित किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इन इलाकों में खासतौर पर ऐसे भवनों की जांच की जा रही है, जहां आवासीय परिसर में दुकान, कार्यालय या दूसरी व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की जानकारी मिली है।

अब असली सवाल- 27 हजार नोटिस के बाद क्या होगा?

नगर निगम के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ नोटिस भेजना नहीं, बल्कि हजारों मामलों की सुनवाई और जांच को निष्पक्ष तरीके से पूरा करना है।

हर संपत्ति के मामले में यह देखना होगा कि उसका स्वीकृत उपयोग क्या है, वास्तविक इस्तेमाल क्या हो रहा है और संबंधित मालिक के पास उसके पक्ष में कौन से दस्तावेज हैं।

यही वजह है कि आने वाले दिनों में नगर निगम की सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मेयर को नोटिस ने बढ़ाई चर्चा

पटना में इस कार्रवाई की सबसे बड़ी चर्चा इसलिए है क्योंकि नगर निगम ने अपनी ही मेयर को नोटिस भेजा है। हालांकि कानूनी तौर पर इसका अर्थ केवल इतना है कि संबंधित संपत्ति के इस्तेमाल को लेकर नगर निगम ने स्पष्टीकरण मांगा है।

अब मेयर की ओर से दिए जाने वाले जवाब और नगर निगम की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा कि संबंधित संपत्ति के मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।

फिलहाल पटना में इस कार्रवाई ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—अगर आवासीय मकानों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर नियमों के मुताबिक कार्रवाई होती है, तो क्या आने वाले दिनों में शहर की हजारों संपत्तियों का इस्तेमाल बदलता नजर आएगा?

नगर निगम की अगली कार्रवाई और सुनवाई से इस सवाल का जवाब सामने आएगा।

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Mahuaa News

Author at mahuaanews.com
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