पटना: राजद में संगठन की पूरी तस्वीर बदलने की कवायद शुरू हो गई है। राज्य से लेकर जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर तक की इकाइयां और पार्टी के सभी प्रकोष्ठ भंग किए जाने के बाद अब निगाहें नई टीम के गठन पर टिक गई हैं। इसी बीच लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य की सलाह ने पार्टी के अंदर चल रही संगठनात्मक चर्चा को और दिलचस्प बना दिया है।
रोहिणी आचार्य ने कहा है कि नई टीम में लंबे समय से पार्टी के साथ जुड़े अनुभवी, जमीन पर सक्रिय और संगठन की समझ रखने वाले नेताओं-कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए संगठन के गठन में उन लोगों को जगह मिलेगी, जिन्होंने वर्षों तक निष्ठा और समर्पण के साथ पार्टी के लिए काम किया है।
रोहिणी ने तेजस्वी को क्या संदेश दिया?
रोहिणी ने राजद के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम पहले ही उठाया जाना चाहिए था। साथ ही उन्होंने लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक विचारधारा और संगठनात्मक सिद्धांतों को आधार बनाकर पार्टी को मजबूत करने की बात कही।
उनके मुताबिक पार्टी में ऐसे लोगों को आगे लाने की जरूरत है, जो लंबे समय से संगठन के साथ खड़े हैं और जमीनी स्तर पर लगातार सक्रिय रहे हैं।
अब नई टीम पर सबकी नजर
सभी संगठनात्मक इकाइयों को भंग किए जाने के बाद राजद के सामने अब नई टीम तैयार करने की चुनौती है। नई समितियों में किन चेहरों को जगह मिलती है और किन नेताओं को जिम्मेदारी दी जाती है, इस पर पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह नजर है।
खासकर बूथ से लेकर पंचायत और जिला स्तर तक संगठन को मजबूत करने के लिए राजद किस तरह का नया ढांचा तैयार करता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
उपचुनाव के बाद शुरू हुआ संगठन में बदलाव
यह फेरबदल बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के बाद शुरू हुआ है। चुनावी नतीजे के बाद पार्टी के भीतर संगठन और नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हुई थीं। कुछ नेताओं के बीच सार्वजनिक बयानबाजी ने भी पार्टी की अंदरूनी स्थिति को लेकर सवाल खड़े किए थे।
अब संगठन की सभी पुरानी इकाइयों को भंग करने के बाद राजद ने एक तरह से ‘रीसेट’ की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऐसे में रोहिणी आचार्य की अनुभवी और जमीनी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने की सलाह नई टीम के गठन में कितना असर डालती है, यह देखने वाली बात होगी।
ये खबर भी पढ़े: Bihar: एक हाथ में मोबाइल, सामने मरीज… सासाराम अस्पताल की ये तस्वीर क्यों पूछ रही है बड़ा सवाल?