गोपालगंज: गोपालगंज के लोगों के लिए लंबे समय से देखे जा रहे मेडिकल कॉलेज के सपने को अब जमीन पर उतरने की उम्मीद बढ़ गई है। बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अचानक नहीं, बल्कि पूरी तैयारी के साथ थावे प्रखंड के चनावे गांव पहुंचे और प्रस्तावित ‘मां थावे मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल’ के लिए चिह्नित जमीन का स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री के इस दौरे के बाद मेडिकल कॉलेज को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज होने के संकेत मिले हैं।
यह वही परियोजना है, जिसे लेकर गोपालगंज में लंबे समय से मांग उठती रही है। अब सियासी घोषणा से आगे बढ़कर मामला जमीन, साइट मैप और प्रशासनिक प्रक्रिया तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।
25 एकड़ 20 डिसमिल जमीन पर खड़ा होगा मेडिकल कॉलेज
प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के लिए कुल 25 एकड़ 20 डिसमिल भूमि चिह्नित की गई है। निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को साइट मैप के जरिए पूरी परियोजना की जानकारी दी।
अधिकारियों ने जमीन की उपलब्धता, संपर्क मार्ग, स्थल की स्थिति और प्रस्तावित आधारभूत सुविधाओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से परियोजना से जुड़ी प्रक्रियाओं की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
सीएम का साफ संदेश- कागज पर नहीं, जमीन पर दिखे काम
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मेडिकल कॉलेज के निर्माण से जुड़ी सभी प्रशासनिक और कागजी प्रक्रियाएं जल्द पूरी की जाएं।
सरकार की कोशिश है कि परियोजना को निर्धारित समय-सीमा के भीतर आगे बढ़ाया जाए। यानी अब चुनौती सिर्फ मेडिकल कॉलेज की घोषणा करना नहीं, बल्कि जमीन से लेकर निर्माण तक की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करना है।
गोपालगंज के मरीजों को बाहर जाने से मिलेगी राहत?
मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के निर्माण से गोपालगंज के स्वास्थ्य ढांचे को बड़ा सहारा मिलने की उम्मीद है। मेडिकल कॉलेज के शुरू होने के बाद जिले में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं, आधुनिक जांच सुविधाओं और गंभीर बीमारियों के इलाज की क्षमता बढ़ सकती है।
इसका फायदा सिर्फ गोपालगंज के लोगों को ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को भी मिलने की उम्मीद है। फिलहाल गंभीर इलाज के लिए मरीजों को दूसरे बड़े शहरों और जिलों का रुख करना पड़ता है।
सालों पुरानी मांग, अब जमीन पर दिखा सरकारी अमला
गोपालगंज में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की मांग कोई नई नहीं है। जिले के लोग लंबे समय से बेहतर और उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधा की मांग करते रहे हैं।
पूर्ववर्ती इंडिया गठबंधन सरकार के दौरान तेजस्वी यादव की ओर से भी मेडिकल कॉलेज को लेकर घोषणाएं की गई थीं। अब सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के स्थल निरीक्षण ने इस परियोजना को फिर से राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
यानी वादा पुराना है, लेकिन अब सरकार की नजर जमीन पर है।
निरीक्षण में पूरा प्रशासनिक अमला मौजूद
मुख्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान राज्य सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी मौजूद रहे। इनमें खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार और विधान पार्षद जनक राम शामिल रहे।
इसके अलावा मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव पर्यावरण एवं वन आनंद किशोर, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि, सारण प्रमंडल के आयुक्त डॉ. मनीष कुमार, डीआईजी नीलेश कुमार, गोपालगंज के जिलाधिकारी समीर सौरभ और पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
थावे की धरती से स्वास्थ्य व्यवस्था को नई पहचान मिलने की उम्मीद
गोपालगंज की पहचान धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण रही है। अब प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के जरिए थावे क्षेत्र को स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि, जमीन का निरीक्षण परियोजना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन असली तस्वीर निर्माण शुरू होने और समय पर पूरा होने के बाद ही साफ होगी। फिलहाल मुख्यमंत्री के निरीक्षण के बाद स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी है कि वर्षों से चली आ रही मेडिकल कॉलेज की मांग अब घोषणाओं से निकलकर निर्माण की दिशा में आगे बढ़ेगी।
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