रोहतास: दिनारा के जोगिया गांव में चंदेश्वर चौधरी की हत्या का मामला अब गांव की सीमा से निकलकर बिहार की राजनीति के केंद्र में पहुंच गया है। भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद इसे केवल आपराधिक घटना नहीं, बल्कि मजदूर के अधिकार, सामाजिक दबाव और कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला बताया।
दीपांकर ने आरोप लगाया कि मजदूरी मांगने को लेकर विवाद के बाद चंदेश्वर चौधरी की हत्या हुई। उन्होंने पुलिस जांच पर भी सवाल उठाते हुए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और गंभीर जांच की मांग की है। उनके मुताबिक हत्या के बाद हुई आगजनी और दूसरी घटनाओं की जांच भी होनी चाहिए, लेकिन मूल हत्या की जांच से ध्यान नहीं भटकना चाहिए।
गांव में पुलिस छावनी, नेता ने उठाया सवाल
घटना के बाद जोगिया और आसपास के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल और मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि इलाके में फिलहाल शांति है और एहतियात के तौर पर सुरक्षा बढ़ाई गई है।
लेकिन इसी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दीपांकर ने सरकार पर निशाना साधा। उनका सवाल है कि अगर पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा है, तो उसके साथ प्रशासन का रवैया कैसा होना चाहिए?
अब मामला मजदूर बनाम सत्ता की बहस तक
दीपांकर भट्टाचार्य ने अपने बयान में मजदूरी, कथित दबाव और कमजोर वर्गों की सुरक्षा को बड़ा मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि किसी मजदूर की मजदूरी मांगने पर हत्या होना बेहद गंभीर चिंता का विषय है।
यही बयान इस मामले को नया राजनीतिक रंग दे रहा है। माले ने संकेत दिया है कि अगर परिवार को न्याय नहीं मिला या जांच पर सवाल बने रहे, तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल
चंदेश्वर चौधरी की हत्या के पीछे वास्तविक विवाद क्या था? पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों का पूरा स्वरूप क्या है? और हत्या के बाद हुई घटनाओं पर पुलिस की कार्रवाई कितनी निष्पक्ष रहती है?
इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि रोहतास का यह मामला सिर्फ एक आपराधिक केस बनकर रह जाता है या बिहार में मजदूर अधिकार और कानून-व्यवस्था की बड़ी राजनीतिक लड़ाई का चेहरा बनता है।
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