रांची: झारखंड की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने भूमि संरक्षण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा निर्देश जारी किया है। उन्होंने भूमि संरक्षण निदेशालय को पिछले पांच वर्षों में किए गए सभी कार्यों का अद्यतन डाटा विभागीय वेबसाइट पर अपलोड करने को कहा है, ताकि योजनाओं की जानकारी आम लोगों और किसानों के लिए आसानी से उपलब्ध हो सके।
रांची के हेहल स्थित जेएमटीटीसी भवन में भूमि संरक्षण निदेशालय द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम में मंत्री ने अधिकारियों के साथ विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लाभ सीधे किसानों तक पहुंचना चाहिए।
अगस्त तक बकाया भुगतान पूरा करने का निर्देश
मंत्री ने तालाब, पर्कोलेशन टैंक (PT), डीप बोरिंग और BPCD जैसी योजनाओं के लिए स्थल चयन और स्वीकृति प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा। साथ ही पिछले वित्तीय वर्ष की देनदारियों और लंबित भुगतानों का निपटारा अगस्त महीने के अंत तक हर हाल में करने का निर्देश दिया।
उन्होंने चेतावनी दी कि तय समय सीमा में कार्य पूरा नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
SMAM योजना में 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने पर जोर
कृषि यंत्रीकरण पर उप-मिशन (SMAM) की समीक्षा करते हुए मंत्री ने अधिकारियों को 100 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने की कार्ययोजना तैयार करने को कहा। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि पिछले वर्ष स्वीकृत नहीं हो सके पात्र आवेदनों को केवल तकनीकी कारणों से निरस्त न किया जाए, बल्कि चालू वित्तीय वर्ष में उन पर नियमानुसार विचार किया जाए।
योजनाओं का होगा सोशल इम्पैक्ट स्टडी
शिल्पी नेहा तिर्की ने सभी जिलों को पिछले पांच वर्षों में संचालित भूमि संरक्षण योजनाओं का सोशल इम्पैक्ट स्टडी कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि किसी योजना की सफलता का वास्तविक पैमाना उसका किसानों और ग्रामीण समुदाय के जीवन पर पड़ने वाला सकारात्मक प्रभाव है।
डैशबोर्ड और जियो-टैगिंग से होगी निगरानी
योजनाओं की निगरानी को और मजबूत बनाने के लिए राज्य स्तरीय डिजिटल डैशबोर्ड विकसित करने की घोषणा की गई। साथ ही सभी परियोजनाओं को जियो-टैग्ड फोटो के माध्यम से रिकॉर्ड करने का निर्देश दिया गया, जिससे वास्तविक समय में प्रगति की समीक्षा की जा सके।
महिला समूहों को मिले ट्रैक्टर
कार्यशाला के दौरान तीन महिला स्वयं सहायता समूहों को ट्रैक्टर भी वितरित किए गए। मंत्री ने कहा कि कृषि यंत्रीकरण से महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
इस अवसर पर विभागीय सचिव अबूबकर सिद्दीक़, भूमि संरक्षण निदेशक विकास कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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