नालंदा: नालंदा जिले के एक निजी अस्पताल में नवजात के कथित रूप से गायब होने और रिकॉर्ड में हेरफेर के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। पटना हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस जांच की प्रगति पर संतोष जताया, लेकिन अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई में देरी पर नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने नालंदा के जिलाधिकारी को दो सप्ताह के भीतर नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
मामला बिहारशरीफ स्थित नवजीवन शिशु अस्पताल से जुड़ा है, जहां एक दंपती ने आरोप लगाया था कि उन्हें बेटा होने की जानकारी दी गई थी, लेकिन बाद में रिकॉर्ड में बदलाव कर उसे बेटी दर्शा दिया गया। इसके साथ ही नवजात के गायब होने और मानव तस्करी की आशंका भी जताई गई थी।
जांच में सामने आई चौंकाने वाली बातें
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नालंदा एसपी ने बताया कि अस्पताल के प्रभारी डॉ. ब्रजेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं। जांच में जब्त दस्तावेजों से पता चला कि 26 मार्च 2023 को अस्पताल में 3.450 किलोग्राम वजन वाले जीवित पुत्र का जन्म हुआ था।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल के प्रवेश रजिस्टर में दर्ज ‘मेल’ शब्द को काटकर उसके आगे अक्षर जोड़ते हुए ‘फीमेल’ बनाया गया। इस कथित हेरफेर ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
17 दिन तक NICU में रहा नवजात
जांच रिपोर्ट के अनुसार, जन्म के बाद नवजात करीब 17 दिनों तक एनआईसीयू में भर्ती रहा। इस दौरान परिजनों को बच्चे से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। वहीं अस्पताल में एनआईसीयू के भीतर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे और सुरक्षा व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई।
कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने फोरेंसिक जांच में हुई देरी और अस्पताल के लाइसेंस पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि मानव तस्करी जैसे गंभीर आरोपों वाले मामलों में संबंधित संस्थान पर तत्काल कार्रवाई आवश्यक है।
एसपी ने अदालत को बताया कि विवादित रजिस्टर को एफएसएल भेजा जा चुका है और दस दिनों के भीतर रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। साथ ही मामले की जांच में पहले लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई भी की गई है।
डीएम को दो सप्ताह में फैसला लेने का आदेश
कोर्ट की सख्ती के बाद अस्पताल के विरुद्ध कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को प्रस्ताव भेजा गया है। हाईकोर्ट ने नालंदा डीएम को निर्देश दिया है कि वे अधिकतम दो सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार उचित आदेश पारित करें। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होगी।
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