पटना: बिहार की प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप योजना को लेकर सियासत तेज हो गई है। बांकीपुर विधायक और जन सुराज नेता प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार पर योजना को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार की आर्थिक क्षमता और किसानों की जमीन के अधिग्रहण को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि “आपके पास सैलरी देने का पैसा नहीं है, आप इतनी जमीन एक्वायर कैसे करेंगे?”
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि सरकार की प्रस्तावित योजना के पीछे बिहार के मध्यमवर्गीय किसानों की जमीन कम कीमत पर लेकर बड़े उद्योगपतियों और बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, ये प्रशांत किशोर के राजनीतिक आरोप हैं और सरकार की ओर से इस आरोप पर प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
‘हजारों एकड़ जमीन एक साथ कैसे एक्वायर करेंगे?’
पटना में किसानों के आंदोलन और सैटेलाइट सिटी योजना को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रशांत किशोर ने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनका कहना था कि राज्य में 11 बड़े शहरों के आसपास हजारों एकड़ जमीन की जरूरत होगी और इतनी बड़ी जमीन का अधिग्रहण आसान नहीं है।
उन्होंने कहा कि जमीन के मालिकों को सिर्फ यह कहना कि जमीन विकसित करने के बाद उन्हें वापस कर दी जाएगी, पर्याप्त नहीं होगा। किसानों को उनकी जमीन का उचित मुआवजा मिलना चाहिए।
किसानों की जमीन को लेकर सबसे बड़ा सवाल
प्रशांत किशोर ने दावा किया कि प्रस्तावित योजना के कारण बड़ी संख्या में किसान प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर किसानों की जमीन औने-पौने दाम पर लेकर बड़े उद्योगपतियों या बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की कोशिश हुई तो इसका व्यापक विरोध होगा।
उन्होंने कहा कि जिस दिन सरकार इस संबंध में कानून लेकर आएगी, उसी दिन से समाज में असंतोष और बढ़ सकता है।
क्या है सैटेलाइट टाउनशिप योजना?
बिहार सरकार ने बड़े शहरों पर बढ़ते आबादी के दबाव को कम करने और राज्य में शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना बनाई है।
योजना के तहत राज्य के प्रमुख शहरों के आसपास नए शहरी क्षेत्र विकसित करने की तैयारी है। इन टाउनशिप में चौड़ी सड़कें, पेयजल, सीवरेज, बिजली, हरित क्षेत्र, स्वास्थ्य सुविधाएं और व्यावसायिक परिसर जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है।
सरकार का लक्ष्य राज्य में शहरीकरण की दर को बढ़ाना है। योजना के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने को लेकर हुडको से दीर्घकालिक ऋण समझौते की भी जानकारी सामने आई है।
‘सरकार के पास सैलरी के पैसे नहीं…’
प्रशांत किशोर ने सरकार की वित्तीय क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार के सामने कर्मचारियों की सैलरी और दूसरे खर्चों की चुनौती है तो इतने बड़े भू-अधिग्रहण और शहरी विकास प्रोजेक्ट को कैसे पूरा किया जाएगा।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब सैटेलाइट टाउनशिप योजना को लेकर किसानों की आपत्तियां और विरोध सामने आने लगे हैं।
युवाओं के आंदोलन पर भी बोले PK
प्रशांत किशोर ने बिहार समेत देश में चल रहे छात्र आंदोलनों का समर्थन करते हुए कहा कि युवाओं की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में देश में लोकतांत्रिक विरोध की ताकत दिखाई दे रही है।
उन्होंने बिहार में छात्रों के आंदोलनों और पुलिस कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि अब सरकार और प्रशासन किसी प्रदर्शन पर कार्रवाई करने से पहले दो बार सोच रहे हैं।
‘छात्रों की जायज मांगें माननी चाहिए’
TRE समेत विभिन्न परीक्षाओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर प्रशांत किशोर ने सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। उन्होंने शिक्षा के बढ़ते निजीकरण, कोचिंग संस्थानों के व्यवसायीकरण, पेपर लीक और बेरोजगारी को युवाओं में बढ़ते असंतोष की प्रमुख वजह बताया।
प्रशांत किशोर ने कहा कि यदि सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेती है तो आने वाले दिनों में सड़कों पर छात्र आंदोलनों का दायरा और बढ़ सकता है।
सैटेलाइट टाउनशिप पर बढ़ेगा सियासी घमासान?
सैटेलाइट टाउनशिप योजना सरकार के लिए बिहार के शहरी विकास का बड़ा प्रोजेक्ट है, लेकिन जमीन अधिग्रहण और किसानों की सहमति का मुद्दा इसके सामने बड़ी चुनौती बन सकता है। प्रशांत किशोर के ताजा हमले के बाद योजना पर सियासी बहस और तेज होने के आसार हैं।
अब निगाह इस बात पर है कि सरकार किसानों की जमीन, मुआवजे और परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता को लेकर विपक्ष के सवालों का क्या जवाब देती है।
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