किशनगंज: अंचल कार्यालय में शनिवार को जनता दरबार के दौरान भूदान की जमीन के दाखिल-खारिज को लेकर किन्नर समाज के लोगों ने जमकर हंगामा किया। करीब दो महीने से मामला लंबित रहने और दाखिल-खारिज पर आपत्ति दर्ज होने से नाराज किन्नर समाज के लोग मुख्य व्यक्ति जहांगीर के नेतृत्व में अंचल कार्यालय पहुंचे थे।
लोगों ने अधिकारियों के सामने अपनी मांग रखते हुए ताली बजाकर विरोध जताया। हंगामे के दौरान आपत्तिकर्ता के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई। कुछ देर तक कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी और गहमागहमी की स्थिति बनी रही।
10 डिसमिल भूदान की जमीन का मामला
पूरा विवाद मौजा घड़ामारा स्थित खाता संख्या-3 और खेसरा संख्या-126 में 10 डिसमिल भूदान की जमीन से जुड़ा बताया जा रहा है। किन्नर समाज के लोगों के अनुसार, जमीन के दाखिल-खारिज के लिए ऑनलाइन आवेदन किया गया था।
आवेदन के बाद एक व्यक्ति ने आपत्ति दर्ज करा दी, जिसके चलते प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। किन्नर समाज का आरोप है कि इस मामले के समाधान के लिए वे करीब दो महीने से अंचल कार्यालय से लेकर जिला कार्यालय तक चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ।
जनता दरबार में पहुंचे लोगों ने दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी करने और जमीन की रसीद जारी करने की मांग की। उनका कहना था कि यदि भूदान समिति की ओर से जमीन का पर्चा जारी किया गया है और उस पर उनका दखल-कब्जा है, तो राजस्व रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
पहले भी जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद
बताया गया कि इसी जमीन को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुका है। प्रभा देवी और उनकी किन्नर संतान ने कुछ लोगों पर कच्चा आशियाना तोड़ने, घर का सामान ले जाने और भूदान की जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश का आरोप लगाया था।
पीड़िता के अनुसार, बिहार सरकार की भूदान यज्ञ समिति ने वर्ष 2008 में मौजा घड़ामारा में 10 डिसमिल जमीन का पर्चा उनके नाम जारी किया था। इसी जमीन पर टिन का घर बनाकर वे रह रहे थे।
आरोप है कि 20 जून की शाम कुछ लोग उनके घर पहुंचे और टिन का आशियाना तोड़ दिया। घर का टिन और अन्य सामान ट्रैक्टर पर लादकर ले जाने का भी आरोप लगाया गया। इसके बाद जमीन पर बाउंड्री निर्माण की कोशिश किए जाने की बात सामने आई।
घटना के बाद पीड़िता ने जिलाधिकारी कार्यालय और थाने में शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की थी। मामले में पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
आर्थिक रूप से कमजोर होने का दावा
किन्नर समाज के लोगों का कहना है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं और मांगकर अपना जीवनयापन करते हैं। उनका दावा है कि भूदान यज्ञ समिति की ओर से उन्हें पांच-पांच डिसमिल जमीन का पर्चा दिया गया है और जमीन पर उनका दखल-कब्जा भी है।
उनका कहना है कि जमीन की रसीद कटवाने और दाखिल-खारिज कराने के लिए लगातार सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगाने से उनका काम-धंधा भी प्रभावित हो रहा है।
अंचल अधिकारी बोले- जमीन और कब्जे की जांच जारी
अंचल अधिकारी राहुल कुमार ने बताया कि मामला भूदान यज्ञ समिति की ओर से दी गई भूमि से संबंधित है। इसकी जांच कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों को विधिवत जमीन का दखल-कब्जा दिया गया है, उसकी भी जांच की जा रही है। भूमि के स्वामित्व, राजस्व अभिलेख और वास्तविक दखल-कब्जे की स्थिति स्पष्ट होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल जमीन के दाखिल-खारिज को लेकर विवाद बना हुआ है और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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