पटना: बिहार की राजनीति में एक इस्तीफे ने जातीय समीकरण और सत्ता की रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। भाजपा MLC देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद विपक्ष ने भाजपा पर हमला बोलते हुए सवाल उठाया है कि क्या पकडौआ मंत्री दीपक प्रकाश की कुर्सी बचाने के लिए एक विधान पार्षद की राजनीतिक कुर्बानी दी गई?
विपक्षी खेमे की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद भाजपा ने डैमेज कंट्रोल के तहत देवेश कुमार से इस्तीफा दिलवाया। देवेश कुमार के इस्तीफे को अब बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि देवेश कुमार, जो सवर्ण समाज से आते हैं, उनकी सीट खाली कराकर क्या भाजपा ने अपने सहयोगी समीकरण को साधने की कोशिश की है? विपक्ष इसी मुद्दे को लेकर सवाल उठा रहा है कि क्या सत्ता की मजबूरी में सामाजिक संतुलन को नजरअंदाज किया गया?
रोहिणी आचार्या ने भी साधा निशाना
राजद नेता रोहिणी आचार्या ने भाजपा पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद भाजपा ने मंत्री पद बचाने के लिए आनन-फानन में रास्ता निकाल लिया।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह फैसला “कुर्सी बचाओ राजनीति” का उदाहरण है। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा ने एक नेता की राजनीतिक कीमत पर दूसरे नेता के लिए रास्ता तैयार किया है।
BJP के सामने अब बड़ा सवाल
देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि खाली हुई विधान परिषद सीट पर भाजपा किसे उम्मीदवार बनाती है और क्या मंत्री दीपक प्रकाश इस सीट से सदन में पहुंचेंगे?
हालांकि भाजपा की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि देवेश कुमार का इस्तीफा दीपक प्रकाश की सदस्यता के लिए ही लिया गया है। वहीं मंत्री दीपक प्रकाश ने भी कहा है कि उन्हें इस्तीफे की पूरी जानकारी नहीं है।
फिलहाल एक इस्तीफे ने बिहार में सत्ता, संविधान और जातीय समीकरण—तीनों को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
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