पटना: बिहार के 35 जिला अस्पतालों में सुपर स्पेशलिटी सुविधाएं विकसित करने की योजना के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विभागीय निर्देशों के बावजूद इन अस्पतालों में निर्धारित 75 तरह के ऑपरेशन में से फिलहाल करीब 45 प्रकार की सर्जरी ही हो पा रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और सुविधाओं के अभाव को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।
राज्य के जिला अस्पतालों को बेहतर और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस करने के लिए सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत जिला अस्पतालों में 75 तरह की सर्जरी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन मौजूदा स्थिति में करीब 45 प्रकार के ऑपरेशन ही हो पा रहे हैं।
कई जरूरी सर्जरी अब भी इंतजार में
जिला अस्पतालों में फिलहाल जनरल सर्जरी, हड्डी से संबंधित कुछ ऑपरेशन, सी-सेक्शन और महिलाओं से जुड़ी सामान्य सर्जरी जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं। वहीं ट्रॉमा और जटिल इमरजेंसी सर्जरी समेत कई विशेषज्ञ सेवाएं अभी पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी हैं।
आंखों से जुड़ी कुछ गंभीर सर्जरी, दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल मरीजों के इलाज और जटिल हड्डी संबंधी मामलों में भी मरीजों को बेहतर सुविधा के लिए बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बनी बड़ी चुनौती
स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी समस्या विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बताई जा रही है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत छह श्रेणियों में 450 विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे गए थे। इनमें से 246 डॉक्टरों को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया, लेकिन 109 डॉक्टर सत्यापन के लिए पहुंचे ही नहीं।
अब विभाग की ओर से इन डॉक्टरों को दोबारा मौका देने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है, ताकि जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर किया जा सके।
‘सात निश्चय-3’ की रफ्तार पर भी नजर
राज्य सरकार के ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम के तहत CHC को स्पेशियलिटी और जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, अस्पतालों में सुविधाओं के विस्तार और विशेषज्ञ सेवाओं की शुरुआत की रफ्तार को लेकर विभाग को समीक्षा की जरूरत महसूस हुई है।
16 सितंबर को होगी बड़ी समीक्षा बैठक
इसी सिलसिले में 16 सितंबर को पटना में राज्य के सभी सिविल सर्जनों की बैठक बुलाई गई है। बैठक में जिला अस्पतालों में ऑपरेशन की स्थिति, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
‘टीबी मुक्त भारत’, ‘एनीमिया मुक्त भारत’ और ‘चिकित्सा आपके द्वार’ जैसे अभियानों की स्थिति पर भी बैठक में रिपोर्ट ली जाएगी।
अब स्वास्थ्य विभाग की इस समीक्षा बैठक पर नजर है कि जिला अस्पतालों में 75 तरह की सर्जरी का लक्ष्य कब तक पूरा होता है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
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