देवघर: राजकीय श्रावणी मेला 2026 में आस्था की भीड़ के बीच इंसानियत का एक सुंदर चेहरा भी सामने आ रहा है। लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ में जहां अपनों से बिछड़ने का डर रहता है, वहीं 34 सूचना सह सहायता केन्द्र ‘अपनों को अपनों से मिलाने’ का मजबूत सहारा बनकर उभरे हैं।
सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग द्वारा संचालित ये केन्द्र न सिर्फ मेला से जुड़ी जरूरी जानकारियां दे रहे हैं, बल्कि बिछुड़े कांवरियों को उनके परिवार से मिलाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। मेला क्षेत्र और कांवरिया पथ पर फैले इन केन्द्रों के माध्यम से हर दिन कई चेहरे फिर से खुशी से खिल उठते हैं।
अनाउंसमेंट से लेकर डिजिटल समन्वय तक
भीड़ में अलग हुए श्रद्धालुओं को खोजने के लिए इन केन्द्रों पर तैनात कर्मी लगातार पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए घोषणाएं कर रहे हैं। इसके साथ ही सभी केन्द्र आपस में डिजिटल रूप से जुड़े हुए हैं, जिससे सूचना का त्वरित आदान-प्रदान हो रहा है। यही वजह है कि कम समय में बिछुड़े लोग अपने परिजनों तक पहुंच पा रहे हैं।
हर कोने में मदद के हाथ
दुम्मा से लेकर त्रिकुट पर्वत और जसीडीह से लेकर बाबा मंदिर परिसर तक—मेला क्षेत्र के प्रमुख स्थानों पर ये 34 केन्द्र सक्रिय हैं। बस पड़ाव, रेलवे स्टेशन, मंदिर परिसर, पार्क और प्रमुख चौक-चौराहों पर इनकी मौजूदगी श्रद्धालुओं को हर कदम पर सहारा दे रही है।
सिर्फ सूचना नहीं, भरोसे का केंद्र
इन सहायता केन्द्रों का उद्देश्य सिर्फ जानकारी देना नहीं, बल्कि भीड़ में सुरक्षा और भरोसा कायम करना भी है। जब कोई कांवरिया अपने परिवार से बिछड़ जाता है, तो यही केन्द्र उसके लिए उम्मीद की किरण बनते हैं।
श्रावणी मेले की भीड़ में ये 34 केन्द्र यह साबित कर रहे हैं कि व्यवस्था अगर संवेदनशील हो, तो हर बिछड़ाव के बाद मिलन संभव है… और हर मुस्कान फिर लौट सकती है।
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