सुपौल: विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी संभालने वाले शिक्षक का क्लासरूम में सोते हुए वीडियो वायरल हुआ तो शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया। जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद सुपौल के उत्क्रमित मध्य विद्यालय जीवछपुर बालक के विशिष्ट शिक्षक अजीत कुमार को निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि शिक्षक विद्यालय अवधि के दौरान कक्षा में कुर्सी पर पैर रखकर सो रहे थे। वीडियो सामने आने के बाद विभाग ने जांच कर कार्रवाई का आदेश जारी किया है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय, सुपौल की ओर से जारी कार्यालय आदेश के अनुसार, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, सुपौल ने अपने पत्रांक 339, दिनांक 28 अक्टूबर 2026 के माध्यम से वायरल वीडियो के संबंध में रिपोर्ट दी थी। इसके बाद विशिष्ट शिक्षक अजीत कुमार के आचरण और विद्यालय में उनकी कार्यशैली की जांच की गई। जांच में पाया गया कि वे विद्यालय अवधि के दौरान जींस पैंट पहनकर कक्षा कक्ष में कुर्सी पर पैर रखकर सोए हुए थे।
जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही, विभाग ने लिया एक्शन
विभागीय आदेश में कहा गया है कि विद्यालय अवधि में विद्यार्थियों को पढ़ाने के बजाय कक्षा में सोते हुए पाया जाना छात्रों के हितों के विरुद्ध है। इससे विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होने की बात कही गई है। आदेश में शिक्षक पर कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी के अभाव और आचार संहिता के उल्लंघन से संबंधित आरोप भी लगाए गए हैं।
विभाग ने इसे बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 और बिहार विद्यालय विशिष्ट शिक्षक (संशोधित) नियमावली, 2024 के प्रावधानों का उल्लंघन मानते हुए प्रथम दृष्टया कार्रवाई योग्य पाया। इसी आधार पर अनुशासनिक प्राधिकार ने अजीत कुमार को निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही के अधीन करने का निर्णय लिया।
निलंबन अवधि में मरौना कार्यालय होगा मुख्यालय
जारी आदेश के मुताबिक, निलंबन अवधि के दौरान शिक्षक अजीत कुमार का मुख्यालय प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय, मरौना निर्धारित किया गया है। उन्हें निर्धारित मुख्यालय में उपस्थिति दर्ज करानी होगी। मुख्यालय से जारी अनुपस्थिति विवरणी के आधार पर नियमों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ता उनके मूल विद्यालय की स्थापना से देय होगा।
शिक्षक के विरुद्ध आरोप पत्र अलग से जारी किए जाने की बात भी आदेश में कही गई है। यानी निलंबन के साथ विभागीय कार्यवाही की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी।
30 अक्टूबर को जारी हुआ निलंबन आदेश
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, सुपौल की ओर से ज्ञापांक 3985 (नि), दिनांक 30 अक्टूबर 2026 को यह आदेश जारी किया गया। इसकी प्रतिलिपि संबंधित शिक्षक, संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सुपौल एवं निर्मली, जिला कोषागार पदाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई और सूचना के लिए भेजी गई है।
वायरल वीडियो से शुरू हुआ यह मामला अब विभागीय जांच और अनुशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया है। शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई के बाद विद्यालयों में शिक्षकों की जिम्मेदारी और कर्तव्यनिष्ठा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
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