सुपौल: सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के दावे उस वक्त सवालों के घेरे में आ गए, जब सुपौल के एक विद्यालय से सामने आए वीडियो ने क्लासरूम की तस्वीर उजागर कर दी। यहां पढ़ाई की जिम्मेदारी संभालने वाले शिक्षक कुर्सी पर पैर रखकर आराम फरमाते दिखाई दिए, जबकि कक्षा में मौजूद मासूम बच्चे इधर-उधर घूमते नजर आए। यानी क्लास में बच्चे मौजूद थे, शिक्षक भी मौजूद थे, लेकिन पढ़ाई होती दिखाई नहीं दे रही थी। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यशैली और स्कूलों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
मामला सुपौल सदर प्रखंड के ग्राम पंचायत हरदी पूरब के वार्ड-3 स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय जीवछपुर बालक का बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे शिक्षक की पहचान अजीत कुमार के रूप में बताई गई है। वह विशिष्ट शिक्षक हैं और मधेपुरा जिले के निवासी बताए जाते हैं।
क्लासरूम बना आरामगाह, बच्चे रहे बगैर पढ़ाई के!
वायरल वीडियो में शिक्षक कक्षा के अंदर कुर्सी पर पैर रखकर सोते नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर बच्चे कक्षा में इधर-उधर घूमते दिखाई देते हैं। जिस समय शिक्षक की जिम्मेदारी बच्चों को पढ़ाने, उन्हें अनुशासित रखने और उनकी पढ़ाई पर ध्यान देने की होती है, उस समय का यह दृश्य कई सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित शिक्षक अक्सर स्कूल में इसी तरह समय बिताते हैं। ग्रामीणों का दावा है कि पहले भी उनकी कार्यशैली को लेकर शिकायत की गई और चेतावनी दी गई, लेकिन कोई खास सुधार नहीं हुआ। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही हो सकेगी।
सवाल सिर्फ एक शिक्षक का नहीं, पूरे सिस्टम की निगरानी का है!
इस घटना ने सरकारी स्कूलों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर स्कूलों में नियमित निरीक्षण किस तरह हो रहा है? बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता की समीक्षा कौन कर रहा है? यदि ग्रामीणों के आरोपों के अनुसार पहले भी शिकायतें हुई थीं, तो उन पर क्या कार्रवाई की गई?
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक बेहतर शिक्षा की उम्मीद करते हैं। ऐसे में क्लासरूम में शिक्षक के सोते हुए दिखाई देने का वीडियो निश्चित रूप से शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
DEO संग्राम सिंह का सख्त रुख, 24 घंटे में मांगा जवाब
वीडियो वायरल होने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी संग्राम सिंह ने मामले पर संज्ञान लिया है। उन्होंने संबंधित शिक्षक अजीत कुमार से स्पष्टीकरण मांगा है और 24 घंटे के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है।
DEO ने कहा है कि वायरल वीडियो की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में लापरवाही की पुष्टि होती है तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ कठोरतम विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब शिक्षक के जवाब और विभागीय कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल मामला स्पष्टीकरण और जांच के स्तर पर है। शिक्षक ने अपना पक्ष क्या रखा है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि 24 घंटे के भीतर दिए जाने वाले जवाब में शिक्षक क्या सफाई देते हैं और जांच के बाद शिक्षा विभाग क्या कदम उठाता है।
सबसे अहम बात यह है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई किसी शिक्षक की मनमर्जी पर निर्भर नहीं रहनी चाहिए। वीडियो की सच्चाई सामने आने के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि विद्यालय में पढ़ाई की नियमित व्यवस्था और निगरानी सुनिश्चित हो, ताकि मासूम बच्चों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित न हो।
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