आरा: आरा के बाबू बाजार में सड़क पर निकलना अब किसी रोजमर्रा के सफर जैसा नहीं, बल्कि जोखिम भरा इम्तिहान बन गया है। यहां न सड़क ठीक से दिखाई देती है और न ही गड्ढों से बचकर निकलने का भरोसा है। ऊपर से कीचड़ और दलदल ने राहगीरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालात ऐसे हैं कि बाइक सवारों को हर कदम पर संतुलन बनाना पड़ता है और स्कूली बच्चों को कीचड़ के बीच से रास्ता तलाशना पड़ता है। जनता की इस परेशानी पर अब गुस्सा भी खुलकर सामने आने लगा है। लोगों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने के बजाय नेताओं के पोस्टर लगाकर ऐसा व्यंग्य किया है कि बाबू बाजार की बदहाली के साथ जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही भी चर्चा में आ गई है।
सड़क पर गड्ढे, कीचड़ में जनता और पोस्टर पर नेताओं के लिए तंज
बाबू बाजार के लोगों ने वार्ड पार्षद प्रतिनिधि संतोष पांडे, महापौर इंदु देवी, सांसद सुदामा प्रसाद और मंत्री सह स्थानीय विधायक संजय सिंह टाइगर के पोस्टर लगाए हैं। इन पोस्टरों पर लिखे नारों के जरिए लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है।
वार्ड पार्षद प्रतिनिधि संतोष पांडे के पोस्टर पर लिखा है- ‘मेरे हाथ में कुछ नहीं, चुनाव आएगा तो बनूंगा जनता का नेता नहीं बेटा।’ महापौर इंदु देवी के पोस्टर पर तंज है- ‘आरा शहर के प्रति समर्पित, कीचड़ से करवा दूंगी शहर का निर्माण।’
वहीं सांसद सुदामा प्रसाद के पोस्टर पर ‘अभी अस्पताल में हूं’ लिखा गया है। मंत्री सह स्थानीय विधायक संजय सिंह टाइगर के पोस्टर पर भी लोगों ने टिप्पणी करते हुए लिखा है- ‘पार्टी का वफादार, जनता का क्यों करें विचार।’
इन पोस्टरों के जरिए स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि जब जनता रोजाना कीचड़ और गड्ढों से जूझ रही है, तो सड़क की समस्या दूर करने की जिम्मेदारी कौन उठाएगा? पोस्टर पर लिखे ये व्यंग्य स्थानीय लोगों के विरोध का तरीका हैं, न कि संबंधित जनप्रतिनिधियों के वास्तविक बयान।
मरीजों के रास्ते में कीचड़, बच्चों के लिए रोजाना जोखिम
बाबू बाजार की परेशानी इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि इस इलाके में स्कूल, कॉलेज और मेडिकल अस्पताल मौजूद हैं। रोजाना बड़ी संख्या में विद्यार्थी, मरीज और उनके परिजन इस रास्ते से गुजरते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चे और अभिभावक अक्सर फिसलकर गिर रहे हैं। बाइक और साइकिल से आने-जाने वालों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
अस्पताल जाने वाले मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह रास्ता चुनौती बना हुआ है। सड़क की हालत के कारण दुकानदारों का कारोबार प्रभावित होने की बात भी स्थानीय लोगों ने कही है।
दशहरा में डाली गई मिट्टी बनी मुसीबत
स्थानीय लोगों के अनुसार, दशहरा के दौरान सड़क पर मिट्टी डाली गई थी। बारिश के बाद वही मिट्टी कीचड़ और दलदल में बदल गई। इससे सड़क की स्थिति और खराब हो गई। लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत और समस्या को सार्वजनिक किए जाने के बावजूद नगर निगम की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं किया गया।
स्थानीय निवासी अमरेन्द्र कुमार ने नाराजगी जताते हुए सवाल उठाया कि क्या जनप्रतिनिधि जनता को अपना परिवार नहीं मानते? उनका कहना है कि लोगों को केवल अस्थायी राहत नहीं, बल्कि सड़क का स्थायी समाधान चाहिए।
पोस्टर से उठे सवाल, अब जवाब काम से देने की बारी
बाबू बाजार में लगे पोस्टर अब सड़क की बदहाली के खिलाफ जनता की नाराजगी का प्रतीक बन गए हैं। लोगों की मांग साफ है—कीचड़ हटे, गड्ढे भरे जाएं और सड़क का स्थायी निर्माण कराया जाए, ताकि स्कूली बच्चों, मरीजों और आम राहगीरों को रोजाना इस परेशानी से न गुजरना पड़े।
अब सवाल यह है कि पोस्टरों पर लिखे तंज के बाद जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और नगर निगम कब जागेंगे? बाबू बाजार के लोग फिलहाल भाषण या आश्वासन नहीं, बल्कि ऐसी सड़क चाहते हैं जिस पर चलने के लिए स्टंट करने की जरूरत न पड़े।
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