नई दिल्ली: SIR के मुद्दे पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष ने दिल्ली में अपनी ताकत का बड़ा प्रदर्शन किया। रविवार को रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक की रैली ने राजधानी का सियासी पारा चढ़ा दिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत विपक्ष के कई बड़े चेहरे इस शक्ति प्रदर्शन में शामिल हुए। विपक्ष का संदेश साफ था—मतदाता सूची और वोट देने के अधिकार के मुद्दे पर अब लड़ाई सड़कों तक पहुंचेगी।
रैली से पहले ही दिल्ली में विपक्षी नेताओं की हलचल तेज हो गई थी। मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव समेत कई नेता पहुंचे। इसके बाद मिंटो ब्रिज से रामलीला मैदान तक मार्च की तैयारी हुई। राहुल गांधी समेत विपक्ष के नेता ओपन रूफ गाड़ियों से कार्यक्रम स्थल की ओर रवाना हुए। रामलीला मैदान में सुबह से ही समर्थकों का पहुंचना शुरू हो गया था। मैदान में कुर्सियां भरने लगीं और कार्यकर्ताओं के नारों से माहौल राजनीतिक रंग में रंग गया।
राहुल का सीधा ललकार भरा संदेश—दिल्ली तैयार हो जाओ!
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिल्लीवासियों को रैली में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने लिखा, “दिल्ली, तैयार हो जाओ। वोट बचाओ, देश बचाओ। कनॉट प्लेस आइए, साथ चलते हैं या सीधे रामलीला मैदान में मिलते हैं। मगर, आना जरूर है।” राहुल की इस अपील को विपक्ष के शक्ति प्रदर्शन से जोड़कर देखा गया। कांग्रेस का प्रयास था कि इस रैली के जरिए SIR के मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में रखा जाए।
खड़गे से अखिलेश तक, एकजुटता दिखाने उतरे विपक्ष के दिग्गज
रामलीला मैदान में कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के सहयोगी दलों के नेताओं की मौजूदगी ने रैली को बड़ा राजनीतिक मंच बना दिया। प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई नेताओं की भागीदारी के जरिए विपक्ष ने अपनी एकजुटता का संदेश दिया। TMC सांसद कीर्ति आजाद ने इसे युवाओं, महिलाओं, किसानों और मजदूरों के अधिकारों से जुड़ा आंदोलन बताया। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की आवाज सुननी होगी।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मताधिकार को लोकतंत्र का बुनियादी अधिकार बताते हुए मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों पर चिंता जताई। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि मतदाता सूची साफ होनी चाहिए, लेकिन इसके नाम पर वास्तविक मतदाताओं के नाम नहीं काटे जाने चाहिए। इन बयानों के जरिए विपक्ष ने रैली का मुख्य मुद्दा मतदाताओं के अधिकारों को बनाया।
25 दिनों में सातवीं बार एकजुट हुआ विपक्ष
SIR के विरोध में पिछले 25 दिनों के भीतर विपक्षी दल सातवीं बार एकजुट हुए। इससे पहले 6 से 13 अक्टूबर के बीच इस मुद्दे पर छह बार प्रदर्शन और राजनीतिक गतिविधियां हुई थीं। 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस, सपा, TMC, RJD, वाम दलों और अन्य विपक्षी नेताओं ने बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया था। इसके बाद 12 विपक्षी दलों के 13 नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कहा था कि SIR से जुड़े फैसले सभी सदस्यों की सहमति से लिए गए थे। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को आयोग के जवाब पर अपनी बात रखने के लिए 10 दिन का समय दिया और अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 के लिए तय की।
सुरक्षा के घेरे में रामलीला मैदान, 250 CCTV कैमरों से निगरानी
विपक्ष की बड़ी रैली को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए। सेंट्रल दिल्ली के DCP रोहित राजबीर के अनुसार, पूरे इलाके में लगभग 200 से 250 CCTV कैमरों से निगरानी की व्यवस्था की गई। रामलीला मैदान के अलग-अलग हिस्सों में बैरिकेडिंग और सुरक्षा घेरे बनाए गए। पुलिसकर्मियों के साथ पैरामिलिट्री फोर्स भी तैनात रही। पुलिस की सहायता के लिए सेवा दल, सिविल डिफेंस कमेटी और स्थानीय RWA के सदस्य भी मौजूद रहे।
विपक्ष का संदेश—वोट के मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं
इस रैली के जरिए INDIA ब्लॉक ने यह दिखाने की कोशिश की कि SIR का मुद्दा अब केवल किसी एक दल का नहीं, बल्कि विपक्ष की साझा राजनीतिक लड़ाई बन चुका है। राहुल गांधी की अपील, अखिलेश यादव की मौजूदगी, खड़गे और प्रियंका गांधी की भागीदारी तथा सहयोगी दलों के नेताओं के बयानों ने विपक्षी एकजुटता को केंद्र में रखा।
रामलीला मैदान में जुटी भीड़ और नेताओं की साझा मौजूदगी के बीच विपक्ष ने चुनाव आयोग से जवाबदेही और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा की मांग दोहराई। अब इस शक्ति प्रदर्शन के बाद सबकी निगाहें चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और 17 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
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