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Bihar: जिस तिरंगे के लिए सीने पर गोलियां खाईं… आज उसी शहीद का घर खंडहर में खड़ा है, 1942 की वो कहानी जो औरंगाबाद भूल नहीं सकता!

औरंगाबाद: 11 अगस्त 1942 को पटना सचिवालय पर तंगे फहराने निकले सात छात्रों पर अंग्रेजी हुकूमत ने गोलियां चलवा दी...

औरंगाबाद: 11 अगस्त 1942 को पटना सचिवालय पर तंगे फहराने निकले सात छात्रों पर अंग्रेजी हुकूमत ने गोलियां चलवा दी थीं। इस घटना में औरंगाबाद के ओबरा प्रखंड के खरांटी गांव निवासी जगतपति कुमार समेत सात छात्र शहीद हुए थे। देश की आजादी के लिए प्राण न्योछावर करने वाले जगतपति कुमार की शहादत को आज भी याद किया जाता है, लेकिन उनकी जन्मस्थली संरक्षण के अभाव में जर्जर हो चुकी है।

सचिवालय पर तिरंगा फहराने निकले थे छात्र

भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 11 अगस्त 1942 को पटना में अंग्रेजी शासन के खिलाफ छात्रों का आंदोलन तेज था। नेताओं की गिरफ्तारी के बाद छात्रों ने पटना सचिवालय पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का निर्णय लिया। बीएन कॉलेज के छात्र जगतपति कुमार भी छात्रों के इस जत्थे में शामिल थे।

छात्र सचिवालय के पूर्वी गेट की ओर बढ़े तो ब्रिटिश प्रशासन ने उन्हें रोकने की कोशिश की। छात्रों के पीछे नहीं हटने पर फायरिंग कर दी गई। गोलीबारी में सात छात्र शहीद हो गए। इसके बावजूद छात्रों ने तिरंगे को झुकने नहीं दिया और सचिवालय पर राष्ट्रीय ध्वज फहरा दिया।

जगतपति कुमार की वीरता से जुड़ा एक कथन स्थानीय स्तर पर प्रचलित है। कहा जाता है कि गोलीबारी के दौरान उन्होंने अंग्रेजों से कहा था, “पैर में गोली क्या मारते हो, सीने पर मारो।” हालांकि, इस कथन की स्वतंत्र ऐतिहासिक पुष्टि के लिए प्रमाणित दस्तावेजों की जरूरत है।

पढ़ाई छोड़ आंदोलन में कूदे

उपलब्ध प्रमाणपत्रों के अनुसार जगतपति कुमार का जन्म 7 मार्च 1923 को खरांटी गांव में हुआ था। शुरुआती शिक्षा गांव में लेने के बाद वह पढ़ाई के लिए पटना चले गए। वर्ष 1938 में कॉलेजिएट स्कूल से मैट्रिक पास करने के बाद उन्होंने बीएन कॉलेज में दाखिला लिया।

1942 में भारत छोड़ो आंदोलन शुरू होने के बाद पटना में छात्र आंदोलन तेज हुआ। जगतपति कुमार भी इसमें सक्रिय हो गए। 11 अगस्त को अनुग्रह नारायण सिंह की गिरफ्तारी के बाद छात्रों ने सचिवालय पर तिरंगा फहराने का फैसला किया था।

सात शहीदों में शामिल थे जगतपति

11 अगस्त 1942 की घटना में जगतपति कुमार के अलावा रामानंद सिंह, रमाकांत सिन्हा, सतीश प्रसाद झा, देवीपद चौधरी, राजेंद्र सिंह और रामगोविंद सिंह शहीद हुए थे। पटना सचिवालय के समीप सात शहीद स्मारक इन सातों छात्रों की शहादत की याद दिलाता है। हर वर्ष 11 अगस्त को उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।

संरक्षण की बाट जोह रहा पैतृक आवास

खरांटी गांव में जगतपति कुमार का पैतृक मकान आज जर्जर हालत में है। स्थानीय लोगों के अनुसार कभी यह भवन गांव की प्रमुख इमारतों में शामिल था। अब देखरेख के अभाव में भवन की स्थिति खराब हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि शहीद की जन्मस्थली को संरक्षित कर स्मारक या संग्रहालय का रूप दिया जाना चाहिए।

गांव में जगतपति कुमार की स्मृति में स्मारक और प्रतिमा मौजूद है। औरंगाबाद शहर में भी उनकी प्रतिमाएं स्थापित हैं, लेकिन स्थानीय लोगों की मांग है कि उनकी शहादत के अनुरूप एक भव्य स्मृति स्थल विकसित किया जाए।

85वीं बरसी पर उठी विरासत बचाने की मांग

11 अगस्त 2026 को जगतपति कुमार समेत सातों शहीदों की शहादत के 85 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस मौके पर उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। वहीं, उनकी जन्मस्थली की बदहाली ने शहीदों की विरासत को संरक्षित करने को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जगतपति कुमार के पैतृक आवास को संरक्षित कर स्मृति स्थल के रूप में विकसित किया जाता है, तो यह नई पीढ़ी के लिए इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।

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Mahuaa News

Author at mahuaanews.com
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