पटना: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मतदान से एक दिन पहले पटना में सियासी माहौल गरमा गया। जनसुराज पार्टी के नेताओं की गिरफ्तारी के बाद पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर देर रात जक्कनपुर थाना पहुंचे, जहां उनकी थाना प्रभारी (SHO) से तीखी बहस हो गई।
जनसुराज का आरोप है कि पुलिस ने पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है, लेकिन उन्हें इसकी सही जानकारी नहीं दी जा रही है। वहीं पुलिस का कहना है कि मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
नेताओं की गिरफ्तारी के बाद थाने पहुंचे PK
जानकारी के अनुसार, बुधवार को पटना पुलिस ने जनसुराज के करीब 20 नेताओं को हिरासत में लिया था। पार्टी ने आरोप लगाया कि उनके नेताओं को बिना स्पष्ट जानकारी दिए अलग-अलग थानों में रखा गया।
इसके बाद प्रशांत किशोर अपने समर्थकों के साथ जक्कनपुर थाना पहुंचे और पुलिस से नेताओं की जानकारी मांगी।
थाने में PK और SHO के बीच हुई बहस
थाने में प्रशांत किशोर ने पुलिस से सवाल किया कि अगर किसी नेता या कार्यकर्ता ने गलती की है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पुलिस को यह बताना होगा कि उन्हें कहां रखा गया है।
इस दौरान प्रशांत किशोर और SHO के बीच तीखी बातचीत हुई।
प्रशांत किशोर ने पुलिस पर दबाव में काम करने का आरोप लगाया। वहीं SHO ने कहा कि थाने में बैठकर पुलिस को धमकी नहीं दी जा सकती। SHO ने यह भी कहा कि वह वर्दी में हैं इसलिए संयम बरत रहे हैं।
PK ने लगाया राजनीतिक कार्रवाई का आरोप
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि पुलिस सत्ताधारी दल के दबाव में काम कर रही है और चुनाव को प्रभावित करने के लिए जनसुराज नेताओं को परेशान किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अगर उनके नेताओं ने कोई गैरकानूनी काम किया है तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए, लेकिन बिना जानकारी दिए हिरासत में रखना गलत है।
जनसुराज ने कार्रवाई को बताया एकतरफा
जनसुराज नेताओं ने आरोप लगाया कि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में उनके कार्यकर्ताओं के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की जा रही है। पार्टी ने दावा किया कि कई नेताओं को देर रात उनके घरों से उठाया गया।
वहीं जदयू ने भी इस मामले को लेकर प्रशांत किशोर पर निशाना साधा है। जदयू एमएलसी नीरज कुमार ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
बांकीपुर उपचुनाव से ठीक पहले हुए इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। एक ओर जनसुराज पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रही है, तो दूसरी ओर प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने की बात कर रहा है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि इस विवाद का चुनावी माहौल पर कितना असर पड़ता है।
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