भागलपुर: पीरपैंती में प्रस्तावित अदाणी पावर प्लांट से जुड़े भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। पीरपैंती किसान समिति के बैनर तले किसानों ने मंगलवार को समाहरणालय परिसर में जिलाधिकारी के समक्ष एक दिवसीय धरना दिया। किसानों ने पीरपैंती पावर प्लांट के लिए प्रस्तावित रेल रोड कॉरिडोर में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में कथित अनियमितता का आरोप लगाते हुए सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।
धरना पर बैठे किसानों का आरोप है कि रेल कॉरिडोर के लिए निर्धारित मापदंड के मुकाबले कथित तौर पर दोगुनी जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि इससे बड़ी संख्या में किसानों की खेती योग्य जमीन प्रभावित होगी। आरोप है कि फलदार और अन्य उपयोगी भूमि भी अधिग्रहण की प्रक्रिया में शामिल की जा रही है।
किसानों ने कहा- तय मापदंड के अनुसार हो अधिग्रहण
किसानों ने कहा कि रेल ट्रैक और कॉरिडोर के निर्माण के लिए जितनी जमीन आवश्यक है, उतनी ही जमीन का अधिग्रहण किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि आवश्यकता से अधिक जमीन लेने से किसानों की आजीविका और कृषि गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
किसानों ने धरने के माध्यम से जिला प्रशासन और राज्य सरकार से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया की समीक्षा कराने तथा किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करने की मांग की। उनका कहना है कि भूमि अधिग्रहण में पारदर्शिता बरती जाए और प्रभावित किसानों की आपत्तियों को सुना जाए।
मांग नहीं मानी तो पटना में आंदोलन की चेतावनी
धरने की अध्यक्षता कर रहे किसान सह मुखिया दीपक सिंह ने कहा कि किसान अपनी जमीन को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए और निर्धारित मापदंड के अनुसार ही भूमि अधिग्रहण किया जाना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों पर सरकार ने गंभीरता से विचार नहीं किया तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा और किसान पटना जाकर धरना-प्रदर्शन करेंगे।
पहले भी उठते रहे हैं सवाल
पीरपैंती पावर प्लांट को लेकर इससे पहले भी स्थानीय किसानों और जनप्रतिनिधियों की ओर से विभिन्न मुद्दों को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। अब भूमि अधिग्रहण का मुद्दा सामने आने के बाद एक बार फिर परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया है।
हालांकि, किसानों द्वारा लगाए गए भूमि अधिग्रहण में अनियमितता और निर्धारित मापदंड से अधिक जमीन लेने के आरोपों पर संबंधित कंपनी या प्रशासन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता सामने आ सकेगी।
ये खबर भी पढ़े: Bihar: जिस तिरंगे के लिए सीने पर गोलियां खाईं… आज उसी शहीद का घर खंडहर में खड़ा है, 1942 की वो कहानी जो औरंगाबाद भूल नहीं सकता!
