रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जांच का शिकंजा अब और कसता जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों के बीच गुरुवार को CID की टीम ने JPSC के निवर्तमान अध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल. ख्यांग्ते के आवास पर छापेमारी कर पूरे मामले में बड़ा कदम उठाया है।
कांके रोड स्थित आवास पर पहुंची CID की टीम ने पुलिस बल के साथ घंटों तक जांच की। अधिकारियों ने JPSC से जुड़े दस्तावेज, फाइलें और अन्य रिकॉर्ड खंगाले। हालांकि जांच के दौरान क्या-क्या बरामद हुआ, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है, लेकिन इस कार्रवाई ने पूरे प्रशासनिक महकमे में हलचल पैदा कर दी है।
इस्तीफे के बाद बढ़ी जांच की रफ्तार
JPSC कार्यालय में CID और रांची पुलिस की कार्रवाई के बाद मंगलवार देर शाम एल. ख्यांग्ते ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने बुधवार को उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इसके बाद आयोग ने 14वीं सिविल सेवा मुख्य परीक्षा समेत नौ परीक्षाओं को स्थगित कर दिया।
25 से 27 जुलाई तक होने वाली मुख्य परीक्षा की तैयारी अंतिम चरण में थी, लेकिन अचानक परीक्षा टलने से हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है।
CID के रडार पर पूरा परीक्षा सिस्टम
CID ने इस मामले में कांड संख्या 16/2026 दर्ज कर जांच शुरू की है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा प्रक्रिया में कहां और कैसे गड़बड़ी हुई। अधिकारियों, कर्मचारियों से लेकर परीक्षा कराने वाली एजेंसी तक सभी की भूमिका की जांच की जा रही है।
पांच गिरफ्तारियों से खुल रहे हैं राज!
इस मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, परीक्षा संचालन से जुड़ी आउटसोर्सिंग एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के निदेशक रामवीर सिंह, कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय तिवारी और कंपनी के दो कर्मचारी मो. उस्मान व मो. एबाद शामिल हैं।
सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।
गोड्डा से गिरफ्तारी, घर से मिले 5 लाख रुपये
जांच में एक बड़ा खुलासा तब हुआ जब कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी को गोड्डा के पोड़ैयाहाट से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार वह किराए के मकान में छिपा हुआ था। तलाशी के दौरान उसके ठिकाने से 5 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
अभ्यर्थियों का सवाल- आखिर कब तक चलेगा पेपर विवाद?
JPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में अनियमितता के आरोपों ने अभ्यर्थियों के बीच गुस्सा बढ़ा दिया है। छात्र सवाल उठा रहे हैं कि बार-बार भर्ती परीक्षाओं पर सवाल क्यों खड़े हो रहे हैं और जिम्मेदार लोगों पर पहले ही कार्रवाई क्यों नहीं होती।
अब सबकी नजर CID की जांच पर है। सवाल बड़ा है—क्या जांच सिर्फ छोटे कर्मचारियों तक सीमित रहेगी या फिर उन चेहरों तक पहुंचेगी, जिनकी जिम्मेदारी पूरे सिस्टम को पारदर्शी बनाए रखने की थी?
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