लखीसराय: सहकारिता विभाग बिहार के तहत एक बड़े वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। दी मुंगेर-जमुई सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड में भवन रेनोवेशन और मरम्मत के नाम पर नियमों को दरकिनार कर भारी राशि खर्च करने का खुलासा जांच में हुआ है।
यह मामला लखीसराय निवासी कमल किशोर सिंह की शिकायत के बाद सामने आया, जिसके आधार पर भागलपुर प्रमंडल के संयुक्त निबंधक द्वारा जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में साफ पाया गया कि बैंक के निदेशक मंडल की बैठकों में बिना कार्यादेश, बिना नक्शा, बिना निविदा और बिना किसी विज्ञापन के ही निर्माण और मरम्मत कार्य कराने का निर्णय लिया गया।
इन कार्यों में बड़ी राशि खर्च की गई, लेकिन पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया, जो कि Banking Regulation Act के प्रावधानों के खिलाफ है। इसके साथ ही यह मामला बिहार सहकारी सोसाइटी अधिनियम 1935 के तहत भी गंभीर अनियमितता की श्रेणी में आता है।
इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विकास कुमार बरियार (अपर निबंधक, न्याय) ने तत्कालीन प्रबंध निदेशक धर्मनाथ प्रसाद को नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही वर्तमान प्रबंध निदेशक को निर्देश दिया गया है कि मामले में शामिल कर्मियों के खिलाफ शीघ्र अनुशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित कर विभाग को अवगत कराएं।
मामले में सिर्फ अधिकारी ही नहीं, बल्कि बैंक के निदेशक मंडल के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सभी निदेशक भी जांच के दायरे में आ गए हैं। सभी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। स्पष्ट कर दिया गया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल प्रक्रिया में गड़बड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितता की आशंका भी जताई जा रही है। विभागीय स्तर पर इस पूरे प्रकरण की निगरानी की जा रही है और आने वाले दिनों में बड़ी कार्रवाई की संभावना है।
फिलहाल सभी की नजर इस हाई-प्रोफाइल मामले पर टिकी हुई है कि जांच के बाद किन-किन अधिकारियों और निदेशकों पर कार्रवाई होती है और यह मामला आगे क्या मोड़ लेता है।
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