रांची: झारखंड सरकार ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसलों पर मुहर लगा दी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में प्रोजेक्ट भवन में हुई बैठक में कुल 49 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में विधानसभा के मानसून सत्र से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
कैबिनेट ने झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र को 6 अगस्त से 12 अगस्त 2026 तक आयोजित करने की स्वीकृति दी है। इस बार विधानसभा का सत्र पांच कार्यदिवसों का होगा।
उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने गिरिडीह और रामगढ़ में नए डिग्री कॉलेज खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। गिरिडीह जिले के जमुआ में बनने वाले डिग्री कॉलेज के लिए करीब 38 करोड़ रुपये और रामगढ़ के मांडू विधानसभा क्षेत्र में डिग्री कॉलेज निर्माण के लिए करीब 40 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य में गंभीर मरीजों को जल्द चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए हेलीकॉप्टर एम्बुलेंस सेवा शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके लिए एक सिंगल इंजन हेलीकॉप्टर सेवा लेने पर सहमति बनी है, जिस पर करीब 9 करोड़ 45 लाख रुपये खर्च होंगे।
धनबाद के सरकारी मेडिकल कॉलेज में आधारभूत संरचना के विकास के लिए 194 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। वहीं रिम्स समेत स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी सरकार ने कई योजनाओं को आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
कैबिनेट ने विश्वविद्यालयों और अंगीभूत महाविद्यालयों के वैसे सेवानिवृत्त शिक्षकों और पदाधिकारियों को 7वें वेतन आयोग के तहत पेंशन लाभ देने की मंजूरी दी है, जिनकी नियुक्ति 1 दिसंबर 2004 से पहले हुई थी।
इसके अलावा सिकल सेल, थैलेसीमिया, हीमोफिलिया, टाइप-1 मधुमेह और अन्य गंभीर बीमारियों से प्रभावित बच्चों के लिए बोर्ड परीक्षा में 75 प्रतिशत उपस्थिति की अनिवार्यता में छूट देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है।
आदित्यपुर नगर निगम के नए भवन निर्माण के लिए करीब 39 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भवन निर्माण के नक्शे को लेकर भी बदलाव किया गया है। अब उन्हीं जगहों पर नक्शा पास किया जाएगा जहां सड़क की चौड़ाई कम से कम 4.5 मीटर होगी।
कैबिनेट के इन फैसलों को सरकार की ओर से शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के क्षेत्र में बड़ा कदम बताया जा रहा है। अब इन घोषणाओं को जमीन पर लागू करने की चुनौती सरकार के सामने होगी।
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