जामताड़ा: जामताड़ा में शनिवार को आस्था और विश्वास का अनोखा संगम देखने को मिला। विपत्तारिणी व्रत को लेकर जिलेभर के मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सुहागिन महिलाओं ने हाथों में पूजा की थाली लेकर मां विपत्तारिणी के दरबार में पहुंचकर पति की लंबी उम्र, संतान की खुशहाली और परिवार को हर संकट से बचाने की कामना की।
जिले के छहों प्रखंडों में व्रत को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। शिव मंदिर, दुर्गा मंदिर, काली मंदिर और हरि मंदिर समेत प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुबह से ही घंटियों की गूंज और मंत्रोच्चार से माहौल भक्तिमय बना रहा।
जामताड़ा के प्रसिद्ध मां चंचला मंदिर में सुबह छह बजे से ही श्रद्धालुओं की कतार लग गई। दूर-दराज के गांवों से पहुंचीं महिलाओं ने मां के चरणों में पूजा सामग्री अर्पित कर परिवार की सुख-शांति का आशीर्वाद मांगा। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, दिनभर में करीब दो हजार से अधिक महिलाओं ने माता के दर्शन किए।
सिंदूर, चुनरी और प्रार्थना… हर महिला की एक ही कामना
पूजा के दौरान महिलाओं ने फल, फूल, नारियल, चुनरी और सिंदूर अर्पित कर मां विपत्तारिणी की आराधना की। पुजारियों ने विधि-विधान से पूजा कराई और श्रद्धालुओं को व्रत कथा सुनाई।
महिलाओं का विश्वास है कि मां विपत्तारिणी की पूजा करने से परिवार पर आने वाले संकट टलते हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
मंदिरों में दिखा भक्ति का रंग
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां विपत्तारिणी देवी दुर्गा का ही स्वरूप हैं। यह व्रत मुख्य रूप से झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में आषाढ़ महीने में श्रद्धा के साथ रखा जाता है।
जामताड़ा में विपत्तारिणी व्रत के दौरान मंदिरों में उमड़ी भीड़ ने जिले की धार्मिक आस्था और परंपरा की झलक पेश की। सुबह से शाम तक मंदिर परिसर भक्तों की आस्था और जयकारों से गूंजते रहे।