गोपालगंज (बिहार): बिहार सरकार के स्वास्थ्य दावों और बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता की पोल खोलने वाली एक बेहद चिंताजनक तस्वीर गोपालगंज जिले के भोरे से सामने आई है। यहाँ करीब 8 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनकर तैयार हुआ नया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) का भवन महज डेढ़ साल के भीतर ही जर्जर होने लगा है। स्थिति यह है कि नवनिर्मित अस्पताल भवन की दीवारों और छतों में कई दर्जन भयानक दरारें आ चुकी हैं, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा होने का डर बना हुआ है। इस बदहाली के बाद निर्माण कार्य कराने वाली एजेंसी की कार्यप्रणाली और इसमें हुए कथित भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उद्घाटन के समय जुटी थी ‘वीआईपी’ फौज
गौरतलब है कि 19 सितंबर 2024 को बिहार के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे द्वारा इस नवनिर्मित भवन का भव्य उद्घाटन किया गया था। उस समय उद्घाटन समारोह में सत्ता और शासन से जुड़े कई दिग्गज नेताओं की गरिमामई उपस्थिति दिखी थी। मुख्य अतिथि के रूप में भोरे विधानसभा के जेडीयू विधायक और पूर्व शिक्षा मंत्री सुनील कुमार, अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण मंत्री जनक राम, सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन, विधान परिषद सदस्य राजीव कुमार, वीरेंद्र नारायण यादव और आफाक अहमद शामिल हुए थे। नेताओं ने तब इस अस्पताल को क्षेत्र के लिए एक बड़ी सौगात बताया था, लेकिन महज डेढ़ साल में ही विकास के इस चमचमाते दावे की सूरत बिगड़ गई।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: नए से तो 40 साल पुराना भवन ही बेहतर था
अस्पताल की इस बदहाल और खतरनाक स्थिति को देखकर स्थानीय ग्रामीणों और इलाज कराने आ रहे मरीजों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि इस नए चमक-दमक वाले खोखले भवन से तो हमारा पुराना अस्पताल ही कहीं ज्यादा सुरक्षित और बेहतर था। पुराना भवन लगभग 40 साल पहले बना था, लेकिन आज तक उसकी एक दीवार में भी दरार नहीं आई। वहीं, जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये फूंक कर बनाए गए इस नए वीआईपी भवन में डेढ़ साल में ही दरारें आ गईं। ग्रामीणों के मुताबिक, यह सीधे-सीधे निर्माण कार्य में हुए बड़े घोटाले और गुणवत्ता से समझौते का जीता-जागता सबूत है।
जांच के बाद निर्माण एजेंसी पर होगी सख्त कार्रवाई: सिविल सर्जन
इस पूरे मामले पर जब गोपालगंज के सिविल सर्जन डॉ. वीरेंद्र प्रसाद से बात की गई, तो उन्होंने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया। सिविल सर्जन ने बताया कि वे अभी अवकाश पर हैं। उन्होंने क्षेत्र की जनता को आश्वासन देते हुए कहा कि छुट्टी से लौटते ही एक उच्च स्तरीय तकनीकी टीम का गठन कर अस्पताल भवन की बारीकी से जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट में जो भी खामियां या तकनीकी चूक पाई जाएगी, उसके आधार पर निर्माण कराने वाली संबंधित सरकारी या निजी एजेंसी के खिलाफ कड़ी कानूनी और दनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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प्रदीप कुमार, गोपालगंज।