सीतामढ़ी (बिहार): राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण और देशभक्ति की भावना यदि परिवार के संस्कारों में शामिल हो जाए, तो वह पीढ़ी-दर-पीढ़ी नई ऊंचाइयों को छूती है। इसे सच कर दिखाया है सीतामढ़ी जिले के रीगा प्रखंड अंतर्गत ग्राम सिंघोरवा के रहने वाले सौरव चौधरी ने। सौरव ने भारतीय सेना के प्रतिष्ठित ‘इंजीनियर्स कोर‘ में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त कर न केवल अपने माता-पिता, बल्कि पूरे बिहार का मान बढ़ाया है।
एक ही आंगन से तीसरी पीढ़ी देश की सुरक्षा में तैनात
सौरव चौधरी की यह सफलता इस मायने में बेहद खास है कि उनका चयन होने के साथ ही परिवार की तीसरी पीढ़ी भारतीय सेना का हिस्सा बनी है। उनके दादा स्वर्गीय सूबेदार (सेवानिवृत्त) चंदेश्वर चौधरी ने आर्मी मेडिकल कोर (AMC) में रहकर लंबे समय तक देश की सेवा की थी। वर्तमान में उनके पिता सूबेदार संजीव कुमार भी भारतीय सेना की ‘कोर ऑफ सिग्नल्स’ में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अब सौरव ने सीधे सैन्य अधिकारी बनकर अपने परिवार की इस गौरवशाली विरासत को एक नया और बड़ा आयाम दिया है।
शानदार कॉर्पोरेट करियर छोड़ चुना सेना का कांटों भरा सफर
सौरव की प्रारंभिक शिक्षा से ही उनमें अनुशासन और कड़ी मेहनत के संस्कार थे। वे बी.टेक (इंजीनियरिंग) की पढ़ाई कर रहे थे, जहां उनके सामने निजी क्षेत्र (कॉर्पोरेट जगत) में एक सुरक्षित और आरामदायक भविष्य का विकल्प खुला हुआ था। लेकिन बचपन से ही पिता और दादा की वर्दी को देखकर बड़े हुए सौरव का झुकाव हमेशा देश सेवा की तरफ रहा। उन्होंने इंजीनियरिंग की सुख-सुविधाओं के बजाय सेना की कठिन चुनौतियों को चुना और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से इस मुकाम को हासिल किया।
इलाके के युवाओं में जोश, सिंघोरवा में जश्न का माहौल
लेफ्टिनेंट सौरव चौधरी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से उनके पैतृक गांव सिंघोरवा सहित पूरे रीगा क्षेत्र में उत्सव का माहौल है। सौरव की सफलता की खबर मिलते ही बधाई देने वालों का तांता लग गया है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर अपनी खुशी का इजहार किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि सौरव की यह कामयाबी इलाके के उन सैकड़ों युवाओं के लिए एक नई राह दिखाएगी, जो सशस्त्र बलों में शामिल होकर देश की सेवा करने का सपना देखते हैं।
राष्ट्र निर्माण में देंगे अपना योगदान
सौरव चौधरी की इस कामयाबी पर उनके परिवार और शुभचिंतकों ने भरोसा जताया है कि वे अपनी कार्यकुशलता और देशभक्ति की बदौलत भारतीय सेना में एक उत्कृष्ट अधिकारी साबित होंगे। उनकी यह सफलता साबित करती है कि यदि युवाओं में सही मार्गदर्शन, कड़ा अनुशासन और लक्ष्य के प्रति ईमानदारी हो, तो वे किसी भी मुकाम को हासिल कर सकते हैं।
ये खबर भी पढ़े: Bihar News : बिहार में ‘गायब गैंग’ का आतंक—अब टावर भी नहीं बचा!