पटना: मोबाइल फोन में आई खराबी को नजरअंदाज करना एक बड़ी कंपनी और उसके सर्विस सेंटर को भारी पड़ गया। पटना जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ग्राहक की शिकायत पर कंपनी को करीब 1.46 लाख रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है।
मामला गया जिले के रहने वाले करण कुमार से जुड़ा है। उन्होंने अधिकृत विक्रेता से करीब 44 हजार 300 रुपये में एक ब्रांडेड मोबाइल फोन खरीदा था। खरीदारी के कुछ समय बाद ही फोन में तकनीकी खराबी आने लगी। मोबाइल बार-बार हैंग होने लगा और सामान्य काम करना बंद कर दिया।
समस्या दूर कराने के लिए ग्राहक ने जुलाई 2015 में पटना स्थित अधिकृत सर्विस सेंटर में फोन जमा कराया। आरोप है कि लंबे समय तक न तो फोन ठीक किया गया और न ही वापस किया गया। कई बार संपर्क करने के बाद भी समाधान नहीं मिलने पर ग्राहक ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान कंपनी और सर्विस सेंटर ने दावा किया कि मोबाइल मरम्मत के बाद ग्राहक को वापस कर दिया गया था, लेकिन आयोग के सामने इसका कोई पुख्ता प्रमाण, रसीद या प्राप्ति दस्तावेज पेश नहीं किया जा सका।
रिकॉर्ड की जांच में आयोग को एक सर्विस सेंटर कर्मचारी का नोट मिला, जिसमें मोबाइल अभी भी सर्विस सेंटर में होने का उल्लेख था। इसके आधार पर आयोग ने कंपनी और सर्विस सेंटर को सेवा में कमी का दोषी माना।
पटना जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्रा और सदस्य रजनीश कुमार की पीठ ने आदेश दिया कि कंपनी ग्राहक को उसी मॉडल का नया मोबाइल उपलब्ध कराए। अगर मॉडल उपलब्ध नहीं है तो 44,300 रुपये की मूल राशि पर 13 अगस्त 2015 से 16 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करना होगा।
इसके अलावा ग्राहक को हुई मानसिक परेशानी के लिए 15 हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये अतिरिक्त देने का भी आदेश दिया गया है।
आयोग ने कंपनी को 120 दिनों के अंदर आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है। उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से इस फैसले को एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है कि कंपनियां खराब उत्पाद और सेवा में लापरवाही नहीं बरत सकतीं।
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