पटना: बिहार में महिला सशक्तिकरण और रोजगार को लेकर सरकार ने जीविका दीदियों के सुझावों को अहम बताया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में जीविका के माध्यम से चयनित 2446 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए कहा कि सरकार ने महिलाओं से मिले फीडबैक के आधार पर कई बड़े फैसले लिए हैं।
सम्राट चौधरी ने कहा कि वर्ष 2024 और 2025 में जीविका दीदियों के साथ महिला संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस दौरान महिलाओं ने पेंशन राशि बढ़ाने, बिजली बिल के बोझ को कम करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग रखी थी। सरकार ने इन सुझावों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं में बदलाव किया।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की मांग पर सामाजिक सुरक्षा पेंशन में वृद्धि की गई और 1 करोड़ 70 लाख परिवारों को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का फैसला लिया गया। इसके अलावा रोजगार को बढ़ावा देने के लिए जीविका समूहों के माध्यम से कई योजनाओं को गति दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में जीविका आंदोलन ने ग्रामीण महिलाओं की तस्वीर बदल दी है। आज गांव-गांव में महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ रही हैं और मुर्गी पालन, बकरी पालन समेत कई क्षेत्रों में काम कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में कुल 2446 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया गया। इनमें एरिया कोऑर्डिनेटर, कम्युनिटी कोऑर्डिनेटर, ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर, अकाउंटेंट, ऑफिस असिस्टेंट, लाइवलीहुड स्पेशलिस्ट और ब्लॉक आईटी एग्जीक्यूटिव जैसे पद शामिल हैं।
सम्राट चौधौरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य जीविका दीदियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत भी सहायता दी जा रही है, ताकि वे अपना छोटा व्यवसाय शुरू कर सकें।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। सरकार का दावा है कि जीविका मॉडल बिहार में महिला आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन चुका है।
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