कैमूर: बिहार के ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों में शामिल मां मुंडेश्वरी मंदिर को अब अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी शुरू हो गई है। छठी शताब्दी के इस प्राचीन मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल कराने की दिशा में सरकार ने कदम बढ़ा दिए हैं।
इसी कड़ी में बिहार के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने विशेषज्ञों की टीम और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ मां मुंडेश्वरी धाम पहुंचकर पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया। विकास आयुक्त पटना से हेलीकॉप्टर के जरिए मां मुंडेश्वरी धाम धर्मशाला पहुंचे, जहां से सड़क मार्ग से मंदिर परिसर पहुंचे और पूजा-अर्चना के बाद पूरे पहाड़ी क्षेत्र का हवाई निरीक्षण किया।
5 से 7 साल में यूनेस्को की तैयारी
विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि मां मुंडेश्वरी मंदिर ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्राचीन मंदिर कई बार पुनर्निर्मित हो चुका है और यहां मौजूद पुरातात्विक अवशेषों का संरक्षण बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के नियमों के तहत मंदिर परिसर में मौजूद प्राचीन भग्नावशेषों को संरक्षित और व्यवस्थित करने की योजना बनाई जा रही है। सरकार की कोशिश है कि अगले 5 से 7 वर्षों में मां मुंडेश्वरी धाम को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिलाया जाए।
पर्यटन के साथ रोजगार के खुलेंगे रास्ते
अधिकारियों के अनुसार, बनारस-कोलकाता एक्सप्रेसवे से मां मुंडेश्वरी धाम की दूरी करीब 4 किलोमीटर है। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण यहां देश-विदेश के पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
इस परियोजना से कैमूर जिले में पर्यटन को नई गति मिलने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
इको टूरिज्म से जुड़ेगा पूरा क्षेत्र
योजना के तहत सिर्फ मंदिर परिसर ही नहीं, बल्कि आसपास के प्राकृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को भी पर्यटन सर्किट से जोड़ने की तैयारी है।
इसके अंतर्गत अधौरा की प्रागैतिहासिक कलाकृतियां, तेलहाड़ कुंड और करकटगढ़ जलप्रपात जैसे महत्वपूर्ण स्थलों को एकीकृत विकास मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा।
इको-टूरिज्म और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मंदिर न्यास समिति, वन विभाग और जिला प्रशासन मिलकर काम करेंगे।
विशेषज्ञों की टीम रही मौजूद
निरीक्षण के दौरान कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार, प्रसिद्ध पुरातत्वविद डॉ. के.के. मोहम्मद, डॉ. शरद सान्याल, प्रोफेसर अनिल कुमार, अधीक्षण पुरातत्वविद हरिओम, कैमूर डीएम नितिन सिंह, डीएफओ, डीडीसी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मां मुंडेश्वरी धाम को यूनेस्को की सूची में शामिल कराने की पहल को बिहार की ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक मंच पर पहुंचाने की बड़ी कोशिश माना जा रहा है।
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