छपरा: छपरा इंजीनियरिंग कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल में देर रात हुई एक घटना को लेकर छात्राओं में आक्रोश फैल गया है। छात्राओं का आरोप है कि आधी रात के समय कॉलेज के प्रिंसिपल और उनके ड्राइवर के हॉस्टल परिसर में पहुंचने से हड़कंप मच गया। घटना के बाद छात्राओं ने विरोध जताते हुए हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक रवैये पर सवाल उठाए।
छात्राओं का कहना है कि गर्ल्स हॉस्टल में रात के समय पुरुष कर्मचारियों या अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर पहले भी चिंता जताई जाती रही है। छात्राओं ने आरोप लगाया कि उन्हें इस तरह की कार्रवाई की पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी, जिससे असुरक्षा का माहौल पैदा हुआ।
हॉस्टल व्यवस्था को लेकर पहले से चल रहा विवाद
गौरतलब है कि गर्ल्स हॉस्टल में कमरों के पुनर्व्यवस्थापन को लेकर पहले से ही छात्राओं और कॉलेज प्रशासन के बीच विवाद चल रहा है। छात्राओं का आरोप है कि सिंगल ऑक्यूपेंसी वाले कमरों में दो-दो छात्राओं को शिफ्ट किया जा रहा है और कई मामलों में उन्हें पहले से लिखित सूचना भी नहीं दी गई।
प्रदर्शनकारी छात्राओं का कहना है कि कुछ कमरों में उनकी अनुपस्थिति में प्रवेश कर सामान हटाने की कोशिश की गई। इसी मुद्दे को लेकर छात्राओं ने प्रशासनिक भवन के सामने धरना देकर विरोध प्रदर्शन भी किया था।
पुरुष कर्मचारी के आने-जाने पर भी उठे सवाल
छात्राओं ने हॉस्टल में एक पुरुष कर्मचारी के आने-जाने को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि गर्ल्स हॉस्टल में सुरक्षा मानकों का पालन होना चाहिए और किसी भी प्रवेश की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।
छात्राओं का आरोप है कि विरोध के दौरान उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुना गया और एक छात्रा की तबीयत भी बिगड़ गई।
प्राचार्य ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
वहीं, कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विमल कुमार ने छात्राओं के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि जिसे छात्राएं ड्राइवर बता रही हैं, वह कॉलेज का इलेक्ट्रिशियन है और तकनीकी कार्यों के लिए आता है।
प्राचार्य ने बताया कि हाल ही में 76 नई छात्राओं का नामांकन हुआ है, जिसके कारण हॉस्टल में कमरों का पुनर्विन्यास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार की जा रही है और छात्राओं द्वारा लगाए जा रहे आरोप तथ्यहीन हैं।
जांच और कार्रवाई पर टिकी नजर
फिलहाल छपरा इंजीनियरिंग कॉलेज का गर्ल्स हॉस्टल विवाद तूल पकड़ चुका है। छात्राएं सुरक्षा और पारदर्शिता की मांग कर रही हैं, जबकि कॉलेज प्रशासन अपने फैसलों को नियमों के अनुरूप बता रहा है।
अब सवाल यह है कि आधी रात हॉस्टल में प्रवेश की घटना को लेकर कॉलेज प्रशासन क्या स्पष्टीकरण देता है और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
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