जमशेदपुर: झारखंड में जेपीएससी परीक्षा और जेएसएससी सीजीएल परीक्षा घोटाले को लेकर सियासत तेज हो गई है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस मामले में सरकार पर निशाना साधते हुए पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है।
जमशेदपुर परिसदन परिसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में रघुवर दास ने कहा कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा घोटाले से भी बड़ा मामला जेएसएससी सीजीएल घोटाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला पिछले 5-6 वर्षों से चल रहा है और अब अभय तिवारी के खुलासे के बाद कई गंभीर सवाल सामने आए हैं।
छात्रों के भविष्य से खिलवाड़, दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई
रघुवर दास ने कहा कि झारखंड जैसे गरीब राज्य में छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि मेहनत करने वाले युवाओं के साथ न्याय हो सके।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि जिस तरह नीट पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार ने सीबीआई जांच कराई, उसी तर्ज पर झारखंड के जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल मामले की भी सीबीआई जांच कराई जाए।
आंदोलन कर रहे छात्रों को मिले सुविधा
पूर्व मुख्यमंत्री ने छात्र आंदोलन को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परीक्षा घोटाले के खिलाफ आवाज उठा रहे छात्रों को दबाने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन कर रहे छात्रों को टेंट लगाने तक की अनुमति नहीं दी जा रही है, जबकि लोकतांत्रिक आंदोलन करने वालों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
चुनावी हार पर बोले- उपचुनाव का असर राष्ट्रीय राजनीति पर नहीं
बीजेपी की मध्य प्रदेश और बिहार में चुनावी हार से जुड़े सवाल पर रघुवर दास ने कहा कि उपचुनाव के नतीजों का राष्ट्रीय राजनीति पर सीधा असर नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि स्थानीय मुद्दे और परिस्थितियां चुनाव परिणामों को प्रभावित करती हैं।
JFC को लेकर टाटा स्टील से बातचीत की बात कही
जमशेदपुर फुटबॉल क्लब (JFC) से जुड़े सवाल पर रघुवर दास ने कहा कि टाटा स्टील ने किन परिस्थितियों में क्लब बंद करने का फैसला लिया है, इसकी समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि क्लब को जारी रखने के लिए संबंधित पक्षों से बातचीत और अनुरोध किया जाएगा।
जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल परीक्षा घोटाले को लेकर रघुवर दास के बयान के बाद राज्य में एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है।
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